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________________ गोम्मटसार कर्मकाण्ड में सिद्धांतचक्रवर्ती आचार्य नेमिचन्द्र ने एक समय प्रबद्ध कर्म वर्गणाओं की संख्या को अभव्य जीवों की कुल संख्या का अनन्तगुणा तथा समस्त सिद्ध राशि की संख्या का अनन्तवां भाग बतलाया है। आचार्य गुणधर प्रणीत कसायपाहुड' के आधार पर आचार्य यतिवृषभ ने चूर्णिसूत्रों के रूप में रचित कसायपाहुड सुत्त की व्याख्या में एक समयप्रबद्ध कर्म वर्गणाओं का विभिन्न कर्मों में विभाजन निम्न प्रकार से निर्देशित किया है। कार्माण वर्गणाओं का सबसे बड़ा अंश-वेदनीय कर्म में जाता है, शेष द्रव्य कर्म में से, वेदनीय कर्म द्रव्य से कुछ कम (आधा) अंश मोहनीय कर्म में परिणमित होता है। इनसे भी कुछ कम द्रव्यकर्म ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय व अन्तराय कर्म प्रकृतियों में जाता है जो इन तीनों में परस्पर समान हैं। शेष में से इन तीनों कर्मों के द्रव्य से कुछ कम किन्तु परस्पर में समान-समान नाम व गोत्र कर्मों में जाता है तथा शेष व सबसे कम भाग आयु कर्म में प्रवेश करता है। गणितीय आधार पर यदि एक समय प्रबद्ध कर्म वर्गणाओं का द्रव्य 30, 720 मान लिया जाये तब उसका विभाजन निम्न प्रकार से होता है। 1. सम्पूर्ण द्रव्यराशि 30,720 के चार समान अंश करने पर इनके 7680-7680 के चार अंश बनते हैं । इनमें एक अंश को 30,720 सम्पूर्ण से ऋण करने पर शेष 23040 को समान-समान रूप से आठों कर्मों में अर्थात् 2880-2880 अंश चले जाते हैं। 2. शेष लघुभाग 7680 के पुनः चार समान भाग 1920,1920 अंश के प्राप्त होते हैं। इनमें से बहुभाग अर्थात् तीन अंश 1980 x 3 = 5760 वेदनीय कर्म में परिवर्तित होते हैं। 3. शेष 1920 राशि के पुनः समान चार अंश करने पर 480-480 के अंश प्राप्त होते हैं। इनमें से बहुभाग अर्थात् 980 x 3 = 1440 अंश मोहनीय कर्म में परिणमित हो जाते हैं। 4. शेष लघुभाग 480 के पुनः चार समान अंश 120-120 प्राप्त होते हैं। इनमें तीन 120120 अंश ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय व अन्तराय कर्मों में पहुंच जाते हैं। 5. शेष उपलब्ध 120 अंश के पुनः चार समान-समान खण्ड 30-30 अंश के प्राप्त होते हैं जिनमें तीन अंश अर्थात् 30x30 = 90 में से आधे-आधे 45-45 अंश नाम व गोत्र कर्मों में पहुंचते हैं तथा शेष 30 अंश आयु कर्म में पहुंचते हैं। इस प्रकार एक समय प्रबद्ध अनन्त कर्म वर्गणाओं का इसी प्रकार विभाजन (वितरण) होता है। इन वर्गणाओं का कुल विभाजन का योग इस प्रकार बनता है - कुल वर्गणाद्रव्य (माना) 30720, कुल कर्म प्रकृति 8 हैं। कर्म वेदनीय | मोहनीय | ज्ञानावरणीय | दर्शनावरणीय | अन्तराय | नाम | गोत्र | आयु राशि 2880 2880 प्रथम | 2880 | 2880 विभाजन | 2880 | 28802880| 2880 120 120 120 | 45 | 45 | 30 द्वितीय | 5760 | 1440 | विभाजन कुल योग - 8640 4320 | 3000 | 3000 | 3000 |292529252910 | | अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011
SR No.526589
Book TitleArhat Vachan 2011 01 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year2011
Total Pages140
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size2 MB
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