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I UnHk& 1. साक्षात् उन-उन भण्डारों का अवलोकन एवं फोटोस्टेट तथा डिजिटल फोटा द्वारा पाण्डुलिपियों
की प्राप्ति।
क्रमशः 7 पाण्डुलिपियाँ प्रथम तथा अन्तिम पृष्ट ( दंसणकहरयणकरंडु दर्शनकथारत्नकरण्ड)। 3. शास्त्री नेमिचन्द्र, तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परम्परा, पृष्ठ- 134
उपाध्ये ए.एन., प्राकृतग्रन्थ परिषद्, स्वाध्याय मण्डल, जैननगर, पालड़ी, अहमदाबाद (गुजरात) शास्त्री नेमिचन्द्र, तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परम्परा, पृष्ठ - 135
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परिशिष्ट
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जैन विद्या संस्थान, जयपुर में संग्रहीत दंसणकहरयणकरंडु की
पांडुलिपि (वे.सं.-878) का प्रथम पृष्ठ
अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011