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________________ विव दान पूजा समुद्यतान् । परोपकारनिरतान्। सम्पक्त प्रतिपाल कानू । श्रीसर्वज्ञोक्तधर्मान् रंजितचेतसान् । कुटंबसा धारकान लंकि तदिविदेदान्। श्राहारालय मात्रदानममन्वितान् सायप्र स्वछत्रसा०सकर लामुरुडादेत स्पष्टुत्र सारावल तस्यता लिनी सुचवला द्वितीय मांद 14सा देवपुत्रामादान एतान) मकीर्ति योग्य ज्ञानवानज्ञानदानैना नि जान|| || मसुददात् मांगल्याळ ॥ श्रीरखः ॥ स्वतच दातव्यमुपदे सुखी नित्या निर्व्याधि म थी करावंतीणकुमा सर्वताव मासुतानुगादिचित्र उजयनरवयवं परिवार यसमा लिययमकमिति या वि। किनारवजय अनमुरखंड दिनमदीवयस्करपयायाम दिशान्मुमता 64 मासदनवरिमउदेउस पिनाममा कुनयनाम एवंडर य नितिन काँड स्वारघटी तामसी नए ॥ संवत् २ वर्षे १४ वर्तमाने द्वितीयायां । नक्षत्रघटी पणन मानो घटी ॥ घंटियाली संघ द्या मालाकार र नीमचे श्रीकंदकंदाची तहान कश्रीपद्मनं दिदेव। तत्यटे। हारक श्रीनवदेहे हरवत्रीदेवत त्यहारकश्री प्रसाई देवा मतदानायखंडेलवालान्दयेावाच जैन विद्या संस्थान, जयपुर में संग्रहीत पांडुलिपि (वे.सं.-878) के 2 पृष्ठ अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011
SR No.526589
Book TitleArhat Vachan 2011 01 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year2011
Total Pages140
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size2 MB
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