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________________ पर व्यालाकृतियां भी अंकित हैं । छत्रावली के ऊपर बनी राधिकाओं में ध्यानस्थ जिनाकृतियां अंकित है। मालाधारी गंधर्व गजारोही भी शिल्पांकित हैं। सफेद बलुआ पत्थर पर निर्मित यह प्रतिमा परमारकला की महत्वपूर्ण देन है । द्वितीय प्रतिमा भी कायोत्सर्ग तीर्थंकर की है, जिसका आकार 106x71x12 सें.मी. है । बलुआ पत्थर पर निर्मित त्रितीर्थी कायोत्सर्ग प्रतिमा का काल शैलीगत आधार पर 12वीं शती ईस्वी की है। कायोत्सर्ग प्रतिमा में तीन तीर्थंकर अंकित हैं । मध्य के तीर्थंकर के दोनों ओर नीचे चांवरधारी एवं छत्रावली के दोनों ओर मालाधारी एवं वितान पर पद्मासनस्थ तीर्थंकर के दोनों ओर गजारोही अंकित हैं । गजों के नीचे मृदंगवादक का आलेखन है।। इसके अतिरिक्त तीन सिरविहीन पद्मासनस्थ तीर्थंकर प्रतिमाएं लगभग 12वीं शती ईस्वी की है, इसका आकार क्रमशः 50x55x28 सें.मी. 56x52x34 सें.मी. 54x50x27 सें.मी. है। प्रतिमाएं बलुआ पत्थर पर निर्मित है, अन्य कलाकृतियों में मुख्य द्वार शाखा का पार्श्व भाग (50x46x34 सें.मी.) पद्मासन पार्श्वनाथ (45x44x48 सें.मी.) चौकोर स्तम्भ में उत्कीर्ण (75x30x25 सें.मी.) एवं शिला लेख है। मुख्य मंदिर के कक्ष में जैन तीर्थंकर की निम्न प्रतिमाएं स्थापित हैं। पद्मासन तीर्थंकर अभिलिखित, पार्श्वनाथ, कायोत्सर्ग एवं छोटी दो तीर्थंकर की प्रतिमायें लगभग 17वीं 18वीं शती ईस्वी की हैं। मल्हारपुरा - मल्हारपुरा गैरतगंज तहसील में गैरतगंज से दक्षिण-पश्चिम में 30 कि.मी. की दूरी पर रायसेन से पूर्व में 14 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। यह 23°17' उत्तरी अक्षांस एवं 77°16' पूर्वी देशान्तर पर अवस्थित हैं। यह विशाल जैन प्रतिमा ग्राम के पास जंगल में स्थित है। संभवतः यह जैन प्रतिमा जो आज भग्नप्राय है एक समय अलंकृत एवं सुन्दर प्रतिमा रही है। देवरी जागीर - देवरी जागीर सिलवानी तहसील में मनकापुर से लगभग एक कि.मी. पूर्व की ओर कच्चे मार्ग पर स्थित है । यह 23°15' उत्तरी अक्षांस एवं 78°32' पूर्वी देशान्तर पर अवस्थित है। यहां से किसी जैन मंदिर के वितान का भग्न शिल्प खण्ड मिला है, जिसमें पद्मासन मुद्रा में महावीर तथा उनके पार्श्व में दोनों ओर कायोत्सर्ग मुद्रा में तीर्थकर प्रतिष्ठित है। प्रतिमा के नीचे कलाकृतियों का अंकन है । महावीर की मुखाकृति के पीछे प्रभामण्डल का आलेखन है। हल्के लाल बलुआ पत्थर खण्ड पर 36x19x13 सें.मी. आकार में निर्मित होकर यह प्रतिमा लगभग 11वीं 12वी शती ईस्वी की प्रतीत होती है। यहीं से ललितासन मुद्रा में अंकित देवी यक्षी अम्बिका अपने दाहिने हाथ में पद्म तथा बांये हाथ से बांयी जंघा पर बैठे हुए पुत्र प्रियंकर को सम्हाले हुये है। प्रियंकर देवी के उरोज को स्पर्श कर रहा है, जिससे पुत्र के वात्सल्य भाव व्यक्त होते हैं। देवी के मस्तक के ऊपर तथा पार्श्व में आम्र लुम्बी का आलेखन है। देवी की केश राशि कुन्तलित होकर जूड़े में व्यवस्थित है। आभूषणों में देवी ने कुण्डल, हारावली, स्तनसूत्र दोनों उरोज के मध्य में लटकता हुआ तरल सूत्र, कटिसूत्र तथा पायजेब इत्यादि धारण किये है। प्रतिमा वितान पर दोनों ओर मालाधारी एवं तीर्थकर की प्रतिमाये शिल्पांकित है। पाठपीठ पर परिचारिका तथा बायी ओर व्याल तथा मध्य में महावीर स्वामी का चित्रण है। बलुआ पत्थर खण्ड पर 73x55x17 सें.मी. आकार में निर्मित यह प्रतिमा लगभग 11वीं 12वीं शती ईस्वी की प्रतीत होती है। प्रतिमा विज्ञान की दृष्टि से यह प्रतिमा उच्च स्तरीय है। देवी का सौम्य भाव तथा पुत्र की वात्सल्य को प्रदर्शित करने के लिये शिल्पी ने बड़ी तन्मयता तथा निपुणता से तराशा है। मुरारी - मुरारी गोहरगंज तहसील में गोहरगंज-भोजपुर मार्ग पर आशापुरी से 2कि.मी. दूरी पर उत्तर दिशा में स्थित है। यह 23°05 उत्तरी अक्षांस एवं 77°39' पूर्वी देशान्तर पर अवस्थित है। गांव में माताबाई नामक स्थान से प्राप्त तीर्थंकर (70x65x35 सें.मी.) पद्मासन में है । अलंकृत 40 अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011
SR No.526589
Book TitleArhat Vachan 2011 01 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year2011
Total Pages140
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size2 MB
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