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________________ अवस्थित है। गांव में मनोहर नागर के खेत में अम्बिका प्रतिमा ( 84x40x12 सें.मी.) लगभग 13वीं शती ईस्वी की है। स्थानक आसन में द्विभंग मुद्रा में देवी आम्रवृक्ष के नीचे बांये हाथ से बड़े बालक प्रियंकर का हाथ पकड़े हैं, दांयी गोद में अन्य शिशु शुभंकर दृष्टिगत है। दांयी ओर नीचे एक उपासक है। देवी आभूषणों से शोभित है। मुख घिसा हुआ है। बैजलपुर बैजलपुर गोहरगंज तहसील गोहरगंज- जबलपुर मार्ग पर गोहरगंज से 2 कि.मी. पश्चिम में स्थित है। यह 23°02′ उत्तरी अक्षांस एवं 74°41' पूर्वी देशान्तर पर अवस्थित है। गांव में देव स्थान पर लगभग 12वीं 13वीं शती ईस्वी की तीर्थंकर प्रतिमा (60x35 सें.मी.) बलुआ पत्थर पर निर्मित पद्मासन में तीर्थंकर का ऊपरी परिकर का भाग भग्न है। नीचे पीठिका पर लांछन अस्पष्ट है । परिकर एवं पीठिका पर लघु प्रतिमाएं जिसमें देव के यक्ष-यक्षी रहे हैं। पूर्णतः अस्पष्ट है । डुमरिया डूगरिया उदयपुरा तहसील में देवरी से 11 कि.मी. दूरी पर स्थित है। यह 23°10' उत्तरी अक्षांस एवं 78°44 पूर्वी देशान्तर पर अवस्थित है। यहां गांव से 27 कि.मी. दूर उत्तर में ऊँचे पठार पर लगभग 11वीं 12वीं शती ईस्वी की प्रतिमा रखी है, जिनमें तीर्थकर सुपार्श्वनाथ की प्रतिमा जिसके अलंकृत वितान है। दोनों भुजा भग्न अवस्था में है, ऊपर वितान पर चारों ओर छोटे-छोटे जैन तीर्थंकर दिखाये गये है । सुपार्श्वनाथ के सिर के ऊपर त्रिछत्र है। प्रतिमा दांये बांये परिचारिकाओं का अंकन है। प्रतिमा लाल बलुआ पत्थर पर निर्मित है। - नया गांव कला • नया गांव कला बरेली तहसील में बरेली के निकट 3 कि.मी. पूर्व दिशा में स्थित है। यह 22°60' उत्तरी अक्षांस एवं 78°16' पूर्वी देशान्तर पर अवस्थित है। गांव में पूर्व दिशा की ओर खंडापति की मढ़िया स्थित है, जिसमें 17वीं शती ईस्वी की बलुआ पत्थर पर निर्मित है । स्थापत्य खण्ड का निचला देव कोष्ठका स्तम्भ है जिसमें दो कायोत्सर्ग मुडा जैन प्रतिमा (25x16x सें.मी.) है। - सेमरी खोजरा- सेमरी खोजरा बरेली तहसील में बरेली से 28 कि.मी. पश्चिम में स्थित है। यह 22°56' उत्तरी अक्षांस एवं 78°05' पूर्वी देशान्तर पर अवस्थित है। गांव में 14वीं शती ईस्वी की तीर्थंकर की पद्मासन प्रतिमा (18x10 सें.मी.) है। श्री मनबोध सिंह के खेत में बलुआ पत्थर पर निर्मित लगभग 14वीं शती ईस्वी की प्रतिमाएं रखी हैं जिनमें प्रथम कायोत्सर्ग तीर्थंकर प्रतिमा (78x47x11 सें.मी.) तीर्थंकर का सादा पादपीठ है, जिस पर मूर्ति लेख उत्कीर्ण है। दोनों पार्श्व में पद्मासन में तीर्थकर बैठे हैं। बितान में सात तीर्थकर प्रतिमायें उत्कीर्ण है। राबाडा - जीराबाडा बरेली तहसील में नया गांव खुर्द के पास स्थित है। यह 23°05' उत्तरी अक्षांस एवं 78°20' पूर्वी देशान्तर पर स्थित है। गांव में 10वीं शती ईस्वी की बलुआ पत्थर पर निर्मित जैन मस्तक ( 30 x 20 सें.मी.) है। बाडी खुर्द बाडी खुर्द बरेली तहसील में बरेली से 18 कि.मी. पूर्व में स्थित है। यह 23°02' उत्तरी अक्षांस एवं 78°05' पूर्वी देशान्तर पर अवस्थित है। यहां आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर बाडी ग्राम के किले के निकट प्राचीन जैन मंदिर है, इसे जैन अतिशय क्षेत्र माना जाता है। यद्यपि मंदिर का पीछे का भाग भग्न है, जो द्वितलीय था, मंदिर मूलतः 12वीं 13वीं शती ईस्वी का रहा है। यहां पर स्थित कलाकृतियां इसी काल की है। मुख्य कक्ष में स्थापित जैन तीर्थंकर प्रतिमा विक्रम संवत् 1281 (ईस्वी सन् 1224) का लेख है, जिसमें विक्रमादित्य की पत्नी आकलय देवी द्वारा प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कराने का उल्लेख है। यहां पर स्थित प्रतिमाओं में प्रथम कायोत्सर्ग तीर्थंकर प्रतिमा है, जिसका आकार (115x35x22 सें.मी.) है प्रतिमा 12वीं शती ईस्वी की है कायोत्सर्ग मुद्रा में तीर्थंकर के पार्श्वचरों में चाकर धारी सेविका यक्ष-यक्षी विद्याधर आदि का परिकर पीठिका एवं वितान पर आलेखन है । वितान अर्हतु वचन 23 (1-2), 2011 - 39
SR No.526589
Book TitleArhat Vachan 2011 01 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year2011
Total Pages140
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size2 MB
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