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________________ विशाल और जालागुलि कद, लम्बे कर्ण आदि महापुरुषों से अनुप्रमाणित हैं । पादपीठ के मध्य में अंकित चक्र चक्रवर्ती होने का द्योतक है । जैन ग्रन्थों के अनुसार मूर्ति राजपुरुष लक्षणों से युक्त है। शान्तिनाथ की प्रतिमा के दाहिने भाग में स्थापित दो मीटर ऊंचाई की कायोत्सर्ग मुद्रा में अंकित पार्श्वनाथ की एक प्रतिमा भी विशेषरूप से उल्लेखनीय है । इसके हाथ खण्डित हैं, पैरों के पार्श्व में परम्परागत चंवरधारी अनुचर उत्कीर्ण हैं | पादपीठ पर दो सिंह अंकित हैं । प्रभामण्डल के स्थान पर परिचयात्मक लक्षण सप्तफण युक्त नाग अंकित है, जिसके शीर्ष भाग पर अर्द्धवृत्ताकार अलंकरण युक्त छत्र निर्मित है, कुंचित केश, दीर्घ कर्ण और अर्धोन्मीलित नेत्र इस मूर्ति की विशेषताएँ हैं। यह मूर्ति परमार काल की है। परमार कालीन भोजपुर के जैन मंदिर में पंचफण युक्त नाग लंबित जैन तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ की मूर्ति पार्श्वनाथ की मूर्ति के तुल्य है। सम्प्रति यह अनुमान है, कि यह अन्यत्र से लाई गई है। भोजपुर के जैन मंदिर के द्वार पर एक अन्य जैन तीर्थंकर की पद्मासन प्रतिमा है। इस प्रतिमा में पार्श्व के चंवरधारी अनुचर है । शीर्ष भाग में दो अन्य जैन प्रतिमाएं योगासन में अंकित हैं । सर्वोच्च भाग में छत्र है। लता बल्लरियों से परिकर अलंकृत है, किन्तु यह प्रतिमा लांछन विहीन है, जिससे इसकी पहचान कठिन है, जैन मंदिर में स्थित इस तीर्थंकर प्रतिमा पर परमार वंशीय राजा भोज के शासन काल का लेख है। यहां से प्राप्त पार्श्वनाथ की प्रतिमा पर परमार राजा नरवर्मन के शासन काल का लेख उत्कीर्ण पिपलिया गज्जू-पिपलिया गज्जू गोहरगंज तहसील में मंडीदीप पोलाहा मार्ग पर 2 कि.मी. दूरी पर मुख्य मार्ग पर स्थित है। यह 23°05' उत्तरी अक्षांस एवं 77°03' पूर्वी देशान्तर पर अवस्थित है। यहां कालीबाई नामक स्थान पर लगभग 13वीं शती ईस्वी की तीर्थंकर पार्श्वनाथ की प्रतिमा है। पद्मासन मुद्रा में देव प्रतिमा की भाव भंगिमा, प्रतीक चिन्ह, परिकर की प्रतिमा अस्पष्ट है । सिर पर सर्पफणों के अवशेष दृष्टिगत हैं। वितान पर दोनों ओर हस्ति का अंकन है जिसके आधार पर पार्श्वनाथ प्रतिमा निरूपित की जा सकती है। उड़द मऊ - उड़द मऊ उदयपुरा तहसील में उदयपुरा से 7 कि.मी. दूरी पर स्थित है यह 23°07' उत्तरी अक्षांस 78°02' पूर्वी देशांतर पर स्थित है। गांव में माताबाई के चबूतरे पर 12वीं 13वी शती ईस्वी के जैन तीर्थंकर पादपीठ का भाग 60x15 सें.मी. जिसमें बीच में देवी प्रतिमा पादपीठ (65x25x50 सें.मी.) में बीच में गज का अंकन है। बरेली - बरेली इसी नाम की तहसील का मुख्यालय है, जो रायसेन से 80 कि.मी. दक्षिण पूर्व में घोर नदी के तट पर स्थित है। यह 23°00' उत्तरी अक्षांस 78°18' पूर्वी देशांतर पर अवस्थित है। यहां विश्राम भवन के पास तीर्थंकर आदिनाथ की प्रतिमा (166x83x63सें.मी.) रखी है। यह प्रतिमा बलुआ पत्थर पर निर्मित लगभग 10वीं शती ईस्वी की है। कायोत्सर्ग मुद्रा में अंकित तीर्थंकर प्रतिमा का निचला भाग भग्न है। पादपीठ के नीचे दो सिंह विपरीत दिशा में मुख किए बैठे हुए है। दाहिने पार्श्व में परिचारक खड़ा है, वितान में कायोत्सर्ग जिन प्रतिमा दोनों ओर परिचारकों सहित खड़ी है। इसके अलावा दोनों ओर विद्याधर युगल, प्रभा मण्डल, अभिषेक करते गजराज, पद्मासन तीर्थंकर प्रतिमा, त्रिछत्र आदि प्रतिमाओं का अंकन है। तीर्थंकर के सिर के कुन्तलित केश जो कंधे तक फैले होने के कारण यह प्रतिमा प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ की है। देवरी- देवरी उदयपुरा तहसील में उदयपुरा से 19 कि.मी. उत्तर पूर्व में स्थित है। यह 23°08' उत्तरी अक्षांस एवं 78°44' पूर्वी देशान्तर पर अवस्थित है। गांव में तालाब के किनारे माताबाई के चबूतरे पर लगभग 12वीं, 13वीं शती ईस्वी की तीर्थंकर प्रतिमा (35x24x15 सें.मी.) रखी है। अमरावद कला - अमरावद कला बरेली तहसील में बरेली से 26 कि.मी. पश्चिम में स्थित है। अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011
SR No.526589
Book TitleArhat Vachan 2011 01 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year2011
Total Pages140
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size2 MB
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