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________________ अर्हत वचन कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इन्दौर वर्ष - 23, अंक - 1-2, जनवरी-जून 2011, 35-42 रायसेन जिले के कतिपय जैन अवशेष . नरेश कुमार पाठक* सारांश मध्यप्रदेश के भोपाल सम्भाग में स्थित रायसेन जनपद के विभिन्न ग्रामों से प्राप्त जैन पुरावशेषों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत आलेख में प्रस्तुत किया गया है। - सम्पादक मध्यप्रदेश के हृदय भाग में अवस्थित रायसेन जिला भोपाल सम्भाग में 22°47' से 22°33' उत्तरी अक्षांश एवं 77°21' से 78° 49' पर विस्तृत है। इसका अधिकांश भाग मालवा के पठार में है, कुछ भाग नर्मदा घाटी में पड़ता है। रायसेन जिले की सीमायें पश्चिम में सीहोर, उत्तर में विदिशा, पूर्व एवं उत्तर-पूर्व में सागर जिला एवं दक्षिण-पूर्व में नरसिंहपुर एवं दक्षिण में होशंगाबाद एवं सीहोर जिले की सीमा है। रायसेन जिले का नामकरण जिला मुख्यालय में प्रसिद्ध दुर्ग के नाम पर रखा गया, जिसकी स्थापना रायसिंह द्वारा की गयी थी। जिले के भौगोलिक विभाजन में विंध्य की श्रेणी का भाग, उत्तर का मालवा का पठार, दक्षिण का नर्मदा घाटी का भाग है। विंध्य की श्रेणियों में अधिकांशतः ऊँची श्रेणी, गढ़ी क्षेत्र की 775.4 मीटर समुद्र तल से ऊँची है । मुख्य श्रेणियों में औसत ऊँचाई 625.2 मीटर है। मालवा के पठार पर गौहरगंज, बेगमगंज, तहसीलें हैं । बरेली तहसील का उत्तर-पश्चिम भी शामिल है। नर्मदा घाटी में उदयपुरा एवं सिलवानी तहसील के भाग हैं, इस जिले से प्रागैतिहासिक काल से मराठा काल तक के अवशेष मिले हैं। इस जिले की देवरी जागीर, सिलवानी, रामगढ़, चान्दना, मडखेड़ा टप्पा, देवरी, उदडमऊ, डूगरिया, मल्हारपुरा, पाटन, भोजपुर, अमरावद, इकलावान, आंकलपुर, पिपलिया गज्जू, टिगरिया, वैजलपुर, खुकरिया, सरई, मुरारी, आनापुरी, सेमरी खोजरा, जामगढ़, नयागांव कला, जीराबाड़ा, बरेली, अमरावदकला, मोडिया, खरगोन, बाड़ी खुर्द, आदि स्थानों से जैन पुरावशेष मिले हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है भोजपुर-भोजपुर गौहरगंज तहसील में भोपाल से 30 कि.मी. दूरी पर बेतवा नदी के तट पर स्थित है। यह 23°06' उत्तरी अक्षांश एवं 77° 38' पूर्वी देशान्तर पर अवस्थित है। भोजपुर जैन शिल्प का केन्द्र था। यहां जैन मंदिर का बाहरी भाग कालान्तर में पुनः निर्मित किया गया था। इसके शिखर और गर्भगृह की छत के ध्वस्त होने से अब खुला अन्तराल दिखाई देता है। निश्चित ही राजा भोज के समय का है। यहां से जैन तीर्थंकर शान्तिनाथ, सुपार्श्वनाथ तथा पार्श्वनाथ की प्रतिमाओं के अतिरिक्त अन्य जैन प्रतिमाएँ भी प्राप्त हुई हैं। भोजपुर के जैन मंदिर से सोलहवें तीर्थंकर शान्तिनाथ की 4.5 मीटर ऊँची मूर्ति मिली है, जो कायोत्सर्ग मुद्रा में है । वक्ष स्थल पर मध्य में श्रीवत्स चिन्ह अंकित है। इनका लांछन हिरण पादपीठ के मध्य में उत्कीर्ण है, जिसके पार्श्व में दहाड़ते हुये सिंह पादपीठ को संभाले प्रदर्शित है । इस प्रतिमा के दोनों पार्श्व भागों में चंवरधारी अनुचर कटयावलम्बित मुद्रा में अंकित किये गये है। पूर्णतया मूर्ति शिल्प के मापदण्डों पर बनाई गई है। किन्तु इसके शारीरिक अवयवों के अंकन में अनुपात की कमी है। कुंचित केश सुरुचिपूर्ण ढंग से अंकित किये गए हैं। प्रभामण्डल सादगीपूर्ण और चौकोर है। * संग्रहाध्यक्ष, केन्द्रीय संग्रहालय, पन्ना (म.प्र.)
SR No.526589
Book TitleArhat Vachan 2011 01 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year2011
Total Pages140
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size2 MB
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