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________________ संदर्भ स्थल रत्न करण्ड श्रावकाचार, आचार्य समन्तभद्र, सागर, 1985, 2/43-46 पृ. 87-89 2. नेमिचन्द्र शास्त्री, तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परम्परा, भाग-2, सागर, पृ. 365-382 तत्त्वसार, आचार्य देवसेन, गाथा 74 तत्त्वदेशना (तत्त्वसार सहित), व्याख्याकार, आचार्य विशुद्धसागर, पंचम संस्करण, कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इन्दौर, 2008, पृ. प्रथम वही, पृ.x वही, पृ. 63 वही, पृ. 64 8. वही, पृ. 64 9. वही, पृ. 66 10. वही, पृ. 66 11. वही, पृ. 66 12. वही, पृ. 66 13. वही, पृ. 121 14. वही, पृ.51 संशोधनोपरान्त प्राप्तः 10.01.11 अर्हत् वचन पुरस्कार वर्ष 21 (2009) घोषित विगत वर्षों की भांति वर्ष 21 (2009) में प्रकाशित अर्हत् वचन के सभी अंकों में से 3 सर्वश्रेष्ठ आलेखों के चयन हेतु गठित त्रिसदस्यीय निर्णायक मण्डल की अनुशंसा के आधार पर निम्नवत् अर्हत् वचन पुरस्कार घोषित किये गये है। इसके अंतर्गत प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्राप्त आलेख के लेखकों को क्रमशः रुपए 5000, 3000 एवं 2000 की नकद राशि शाल, श्रीफल एवं प्रशस्ति से सम्मानित किया जायेगा। प्रथम पुरस्कार Samayasāra Gatha 3 and the Modern Science Prof. P.M. Agrawal, Udaipur द्वितीय पुरस्कार Lure of Large Numbers Dr. R.S. Shah, Pune तृतीय पुरस्कार Development of Mathematical Science Including Jaina Mathematics in the Periphery of Pataliputra Dr. Parmeshver Jha, Supaul वर्ष 2010 के पुरस्कार शीघ्र घोषित किये जायेगे। 2011 में भी यह योजना गतिमान है। वर्ष 2009 एवं 2010 का पुरस्कार समर्पण समारोह अक्टूबर -2011 में आयोजित किया जायेगा। डॉ. अजित कासलीवाल डॉ. अनुपम जैन प्रकाशक सम्पादक अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011
SR No.526589
Book TitleArhat Vachan 2011 01 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year2011
Total Pages140
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size2 MB
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