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श्रीमती साधना डोसी के मंगलाचरण से प्रारंभ उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. नेथन केटज ने कहा कि कुन्दकुन्द आचार्य बहुत बड़े संत थे। उनके द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत सभी के लिए महत्वपूर्ण हैं। हिन्दू एवं बौद्ध धर्म को गहराई से समझने हेतु जैन धर्म का अध्ययन आवश्यक है । जैन धर्म के अध्ययन बिना हिन्दू एवं बौद्ध धर्म का ज्ञान अधूरा ही होगा। विश्व में आज अनेकों
अर्हत् वचन के विमोचन का दृश्य समस्याएं मुंह खोले खड़ी हैं। इनका समाधान अहिंसा, अपरिग्रह एवं अनेकांत को व्यावहारिक रूप में जीवन में अपनाने से ही संभव है। आपने कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ केन्द्र के माध्यम से देवी अहिल्या वि.वि. इंदौर के सम्मुख अकादमिक आदान-प्रदान का प्रस्ताव रखा जिसे सत्र की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. पी.के. मिश्र ने स्वीकार कर लिया। प्रो. मिश्र ने जैन, बौद्ध एवं हिन्दू धर्म में प्रतिपादित जीवन शैलियों की चर्चा की एवं विश्वास दिलाया कि कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ को वि.वि. का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।
प्रो. ललिताम्बा ने प्रो. केट्ज के व्याख्यान का हिन्दी में अनुवाद प्रस्तुत किया एवं अपनी ओर से कहा कि कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ एवं डॉ. अनुपम परस्पर एक दूसरे के पूरक हैं। डॉ. कासलीवाल का योगदान भी सराहनीय रहा है।
इस अवसर पर अर्हत् वचन वर्ष 22, अंक 3-4, जुलाई-दिसम्बर 2010 अंक का विमोचन भी प्रो. केट्ज एवं कुलपति महोदय द्वारा किया गया। दि. 1.12.10, प्रातः 11.30- 12.30 प्रथम तकनीकी सत्र (आमंत्रित व्याख्यान) अध्यक्षता
प्रो. नरेन्द्र धाकड़, अति. संचालक-उच्चशिक्षा, इंदौर-उज्जैन संभाग संचालन
प्रो. एस.के.बंडी, विभागाध्यक्ष-गणित, आई.पी.एस. एकेडमी, इंदौर वक्ता
1. डॉ. सरोज कोठारी, महारानी लक्ष्मी बाई शा.कन्या महाविद्यालय, इंदौर
"Relevence of Forgiveness for Pshycological Well Being of Human
Society" 2. श्रीमती केशर जैन, इंदौर
"Shri Virachand Raghavaji Gandhi & his Contribution to Jainism" 3. डॉ. प्रगति जैन, संघवी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेन्ट, इंदौर
"Jaina Elucidation of Mathematics with Reference to Dhavala Text" 4. डॉ. संगीता विनायका, इंदौर
'मानवीय मूल्यों पर आधारित जैन संस्कृति' दि. 1.12.10, मध्या. 02.00-03.00 द्वितीय तकनीकी सत्र (शोध पत्र वाचन) अध्यक्षता
डॉ. देवकुमार जैन, प्राध्यापक-हिन्दी, रायपुर संचालन
डॉ. प्रगति जैन, संघवी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, इंदौर 118
अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011