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अर्हत् वचन कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इन्दौर
संक्षिप्त आख्या
राष्ट्रीय जैन विद्या संगोष्ठी इंदौर 1-2 दिसम्बर 2010 * अनुपम जैन*
कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ इंदौर द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जैन विद्या संगोष्ठी, कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ (दि. जैन उदासीन आश्रम) इंदौर के परिसर में 12 दिसम्बर 2010 को आयोजित की गई। इस वर्ष संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में फ्लोरिडा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, मियामी ( फ्लोरिडा ) अमेरिका के धार्मिक अध्ययन केन्द्र के निदेशक एवं प्रथम भगवान महावीर प्रोफेसरशिप से सम्मानित प्रो. नेथन केट्ज पधारें। उदघाटन एवं समापन सत्र के अतिरिक्त संगोष्ठी के 3 तकनीकी सत्रों में 14 शोध पत्रों का वायन किया गया। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर
जैन विद्या संगोष्ठी में समागत विद्वत् जन
1. कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ पुरस्कार 2009 समर्पण।
2. दुर्लभ पाण्डुलिपि प्रदर्शनी ।
3. कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ व्याख्यान ।
4. क्षु. जिनेन्द्रवर्णी स्मृति व्याख्यान ।
भी आयोजित किये गये। इनकी रिपोर्ट अलग से प्रकाशित की जा रही है।
संगोष्ठी का सफल संयोजन प्रो. श्रेणिक बंडी, श्री होलास सोनी एवं श्री रमेश कासलीवाल के त्रिसदस्यीय संयोजक मंडल द्वारा किया गया।
संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों की सत्रवार आख्या निम्नवत् है ।
उदघाटन सत्र 1.12.10 प्रातः 9.30-11.00 बजे
सत्र की अध्यक्षता देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी. के. मिश्र ने की एवं मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. नेथन केट्ज (F.I.U. मियामी) उपस्थित थे । वि. अ. के रूप में डॉ. एम. के. पाण्ड्या, पूर्व अध्यक्ष JAINA-U.S.A. उपस्थित रहे । श्रीमती साधना दोशी के सस्वर मंगलाचरण से प्रारंभ इस सत्र में मंच पर पं. रतनलाल जैन शास्त्री, प्रो. नरेन्द्र धाकड़, अतिरिक्त संचालक - उच्चशिक्षा (इंदौर), प्रो. प्रेमसुमन जैन (श्रवणबेलगोला), प्रो. गोकुलचंद जैन (वाराणसी), प्रो. ललिताम्बा (बैंगलोर), प्रो. गणेश कावड़िया (इंदौर), डॉ. अजित कासलीवाल (इंदौर) उपस्थित रहे। स्वागत भाषण डॉ. नरेन्द्र धाकड़ ने दिया तथा संस्था परिचय एवं संगोष्ठी की विषयवस्तु का परिचय प्रो. श्रेणिक बंडी ने दिया ।
अर्हत् वचन 23 (1-2), 2011
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