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________________ के आवक तंत्रिका तंतु (dendrites ) से संयोग स्थापित करते हैं। इनके मिलाप या संगम 1 स्थान को junction या synapse कहते हैं । संगम स्थान ( synapse), जो कि जावक तंत्रिका तन्तु (dendrite) के अंत में होता है, ग्राहक आवक - तंत्रिका तन्तु की झिल्ली से समीपी संयोग में रहता है। - जब तंत्रिका - निषेकों के जुड़ाव अन्य तंत्रिका निषेकों (neurons) से होते हैं तभी तंत्रिका परिपथ या जालीदार काम (neural circuits or networks) की संरचना हो जाती है । ये परिपथ मात्र कोई अटकल पच्चू रूप से जुड़े निषेक समूह नहीं होते हैं। मानवीय अनुमस्तिष्क (cerebellum), में लगभग दस अरब (10,000,000,000) तंत्रिका - निषेक होते हैं। ये तंत्रिका - निषेक पाँच प्रकार के होते हैं, जिनके स्थान अनुमस्तिष्क के अलग - अलग विशेष भागों में होते हैं तथा वे अन्य प्रकार के तंत्रिका - निषेक से भी जुड़े रहते हैं। तंत्रिका जैव- वैज्ञानिकों को लगातार तंत्रिका की संरचना एवं कार्य के बीच सम्बन्धों की खोज में लगा रहना होता है। यथा: नेत्र के तंत्रिका - निषेक एवं अनुमस्तिष्क भी भीतरी त्वचा (cortex) किस प्रकार दृष्टि सम्बन्धी सूचना प्रसारित करती हैं। हो सकता है कि इसमें पशुओं के नाम कर्म सम्बन्धी वर्गणाएं (genes) अपना (genetic code ) रूपी नियंत्रण रखती हों। तंत्रिका निषेक अपना व्यापार विद्युत संकेतों (signals) द्वारा करते हैं। संकेतों की प्रक्रिया जैव भौतिकी का विषय बन चुका है। जब किसी तंत्रिका - निषेक (neuron) को उद्दीप्त ( stimulate ) किया जाता है तो उसकी झिल्ली (membrane) में यह संकेत विद्युत रासायनिक खलबली ( अशांति) मचाता है। इससे झिल्ली (membrane) के पार विद्युत विभव (potential) में संक्रमक स्थानीय परिवर्तन होता है। झिल्ली का विभव (potential) शीघ्रता से बढ़ता है जो लगभग वोल्ट (volt) का दशांश होता है। और बाद में वह पूर्ण अवस्था में वापस चला जाता है। यह सम्पूर्ण प्रक्रिया 1 / 1000 या 1 / 10000 सेकेण्ड समय में हो जाती है। इस समय कहा जाता है कि निषेक में कर्म - विभव ( अनुभाग या action potential) को दाग दिया (fire किया) है। ऐसे कर्म अनुभागों (action potentials) को देखा जा सकता है, जब तंत्रिका - निषेक की सतह पर या उसके भीतर इलेक्ट्राइड्स (विद्युत अग्र- बैटरी के विद्युत छोरों) को रखा जाता है और संवेदनशील विद्युत विस्तारक तथा विभवमापी यंत्रों से उन्हें जोड़ दिया जाता है। ग्राफिक रिकार्ड में विभव में शीघ्र परिवर्तन 'कील' (spike) के रूप में दिखाई देता है। यह 'स्पाइक' या 'कील' शब्द "कर्म अनुभाग" के लिए दूसरा शब्द है। अर्थात् action potential, जिसे क्रिया विभव रूप में अनुवादित किया गया है। कर्म अनुभाग किसी जावक तंत्रिका तन्तु या तंत्रिका अक्ष (axon ) के किसी भाग में कर्म - अनुभाग पड़ोसी भाग को उत्तेजित (excite) करता है, जिससे वह दाग देता है, और बदले में यह अगले पड़ोसी भाग को उत्तेजित करता है। इस प्रकार यह संकेत (signal) भाग-भाग पर गमन करता हुआ अंत में जावक तंत्रिका तन्तु (axon) के अंतिम छोर तक पहुँचता है। - वस्तुतः तंत्रिका संकेत विद्युत धारा नहीं होते हैं जो संचालक केविल में शांति से बहते चले जायें। जावक तंत्रिका तंतु (axon) में से होकर गमन करने वाली वस्तु विद्युत रासायनिक पदार्थ होती है जो उत्तरोत्तर जावक तंत्रिका तन्तु (axon ) के प्रत्येक भाग पर आक्रमण करती है, प्रत्येक बिन्दु पर संकेत पुन: उत्पन्न होता है नये सिरे से, और उसका आकार तथा आयाम (amplitude) हर स्थल पर समान होता है। - - अर्हत् वचन, 14 (1), 2002 Jain Education International इस प्रकार र्म- अनुभाग (action-potential), इस प्रकार के नियत प्रकार का ( stereo typed) "सर्वास्ति अथक सर्वनास्ति" या "अस्ति अथवा नास्ति" रूप घटना जैसा होता है। For Private & Personal Use Only 81 www.jainelibrary.org
SR No.526553
Book TitleArhat Vachan 2002 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year2002
Total Pages108
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size7 MB
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