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मार्च - २०१३ थया पछी नभसेनना मनमा प्रगटी चूकेलो प्रबळ वैरभाव अंगारानी जेम तपीने लाल-घूम थई गयो होय छे, अवसरनी राह जोता नभसेनना मनमा सागरचंद्र प्रत्येनो वैरभाव प्रबळ बने छे.
एकदा सागरचंद्र स्मशानमां काउसग्ग ध्याने उभा होय छे. नभसेनने आज अवसर मळी जाय छे. कोई जोतुं नथी ने एवी चोकसाईथी चारे-बाजु जोई, बाजुमां सळगती चितामांथी धगधगता अंगारा घडाना ठीकरामां लई सागरचंद्रना माथा पर मूके छे. सागरचंद्र क्षमा धरी चलित नथी थतां, वेदना समभावे सहन करे छे, अतिशय गरमीना कारणे माथु फाटी जाय छे. काळ करी सौधर्मदेवलोकमां पधारे छे. त्यांथी च्यवी महाविदेहमां जन्म लई, कर्म खपावी, मुक्ति प्राप्त करशे.
ढाळ आठमी, कड़ी - ८, (कडी क्रमांक २०-२८)
लाखा फूलांणीना गीतनी देशी । आगळनी गाथाओमा रासनो सारांश आप्यो छे. बहु प्रेम भरीने सागरचंद्रनी समता अने उपसम रसना परिभावन विशे श्रोताओने आंगळी चींधणुं कर्षं छे. सागरचंद्रना गुण गातां पोतानी रसना पावन थई छे. प्रारंभनी गाथामां अंगि वाधि अतिवान' कह्यु हतुं, अहीं 'रसना थाई पवित्त' आ पद मूकी, ए वातने फलितार्थ करी छे. पाछळनी गाथाओमां विजयशेखर महाराज पोतानी गुरु-परंपरा अने संवत स्थळादिनो उल्लेख करे छे. साथे-साथे आ रास आवश्यकसूत्रना आधारे लखायो छे. एवं सूचित करी, पुलकित भाव साथे आ रास पूरो करे छे.
सागरचंद रास अने आवश्यकसूत्र # सागरचंद रासनी रचना कविना जणाव्या अनुसार आवश्यकसूत्रमा आपेल
कथानकना आधारे थई छे. आवश्यकमां आ कथानक बहु संक्षिप्तमा मळे छे. कविए रासमां काव्यना अभिनव रंगोनी पूरणी करी छे. क्यांक-क्यांक रासना प्रवाहने कविए कथानुसार वहेतो कर्यो छे, तो क्यांक पात्रनी मानसिकताने देखाडवा कथानुं वहेण बदलावी, कथाने मानव-स्वभावनी वास्तविकता नजीक लई जवानो स्तुत्य प्रयास कर्यो छे. दा.त. नारदर्नु कमलामेलाने मळीने सागरचंद्रने त्यां फरीथी आवद्यु, कमलामेलानी प्राप्ति माटे सागरचंद्रने आश्वासन आपg, नभसेनना विनयभंगे नारदर्नु कोपायमान थबु, विगेरे घणा स्थानोमां कविए कथानकने वणवामां थोडी छूट लीधी छे. प्रस्तुत रास अने आवश्यक संबंधी साहित्यमा मळती कथा-अंशोना फेरफारोनी नोंध नीचे मुजब छे.
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