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________________ ७२ : श्रमण, वर्ष ५९, अंक १/जनवरी-मार्च २००८ कंटोल के माध्यम से टी.वी.को चालू कर रहा और बंद कर रहा, जबकि बीच में कोई माध्यम नहीं है। कई वैज्ञानिक उपकरण शरीर के अवयवों के स्थान पर कार्यरत हैं। आज ऐसे भी यंत्र उपलब्ध हैं जो शारीरिक संतुलन को ठीक बनाये रखने में सहायता करते हैं एवं हलन-चलन, कंपन, स्पंदन, धड़कन गति को बताने में सक्षम है। वैज्ञानिक साधनों के आधार पर यह पता चल जाता है कि खनिज भंडार-धातु, गैस, रसायन एवं तरल पदार्थ अमुक धरती के गर्भ में समाहित है। आज विज्ञान ने इतनी प्रगति कर ली है कि शायद ही कोई ऐसा विषय हो जो उसके हाथों से बचा हो। विज्ञान ने पूरी पृथ्वी को अपने वश मे कर लिया है और अब इसकी कोशिश आसमान को कब्जे में करने की है। मानव ने अपने चरण चंद्र पर रख दिये हैं, विज्ञान एक ऐसी दिव्य शक्ति है, एक ऐसा चमकता तारा है जिसने मनुष्य को सभी प्राणियों से सर्वश्रेष्ठ बना दिया है। जिस प्रकार हर चीज के दो पहलू होते हैं सकारात्मक व नकारात्मक उसी प्रकार विज्ञान के नकारात्मक पहलू भी है। विज्ञान के सकारात्मक पहलुओं को हम देख चुके, पर विज्ञान के नकारात्मक पहलू भी हैं जिसका जिम्मेदार केवल मानव है। आज के इस वैज्ञानिक युग की प्रगति देख एवं इसके चमत्कारिक आविष्कारों को देखकर यह बात समझ में नहीं आती कि इतनी सुख-समृद्धि के बावजूद आज भी मानव तनाव में क्यों हैं? हमारे पास खाना है पर भूख नहीं है, हमारे पास कपड़े तो हैं पर साफ नहीं हैं। हमारे पास ए०सी० है पर सुकुन की नींद नहीं है, इन सबका कारण क्या है? वैज्ञानिक आविष्कारों में सबसे बड़ा आविष्कार ओपेन हियर नामक वैज्ञानिक द्वारा निर्मित अणुबम है। अगर सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाए तो अणु विद्युत बनाने के लिये उपयोग में लाया जाता था। न्यूक्लियर पदार्थ युरा नाम से ऊर्जा मिलती है, जिससे भारी मात्रा में विद्युत उत्पन्न किया जा सकता है पर नकारात्मक पहलू पर सोचा जाए तो इस अणुबम में इतनी शक्ति है कि यह अणुबम विश्व का विनाश कर सकता है। हिरोशिमा व नागाशाकी पर अमरीका द्वारा अणुबम विस्फोट हम देख व सुन चुके हैं जिसका असर लगभग ६० वर्षों बाद भी हम देख सकते हैं। आज छोटा देश भी अपनी वैज्ञानिक योग्यता के आधार पर बड़े से बड़े देश को डरा-धमका रहा है। प्रत्येक देश अपनी ही चिंता करता है न उसको पड़ोसी देशों के साथ कोई सहानुभूति है, न संवेदना। विश्व के महान् देश आज अपनी-अपनी वैज्ञानिक उपलब्धि के आधार पर एक-दूसरे के विनाश हेतु कटिबद्ध है। विश्व के मानव मात्र को सावधान करते हुए कवि दिनकर ने कहा है सावधान मनुष्य! यदि विज्ञान के तलवार तो इसे फेंक तजकर मोह स्मृति के पार। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.525063
Book TitleSramana 2008 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShreeprakash Pandey, Vijay Kumar
PublisherParshvanath Vidhyashram Varanasi
Publication Year2008
Total Pages138
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Sramana, & India
File Size6 MB
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