________________
श्रमण
जैन जगत्
स्व० आचार्य श्री जयमल जी महाराज की २८८वीं जयन्ती समारोह सम्पन्न
इन्दौर, ३ - १० सितम्बर, १९९५ : स्व० आचार्य श्री जयमलजी महाराज की २८८वीं जयन्ती के अवसर पर श्री वर्धमान श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन श्रावकसंघ के तत्त्वावधान में तीन से दस सितम्बर तक स्थानीय परसरामपुरिया विद्यालय, जवाहरमार्ग, राजमोहल्ला, इन्दौर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। दिनांक दस सितम्बर को आयोजित विराट कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्श्वनाथ विद्यापीठ के मंत्री श्री भूपेन्द्रनाथ जैन ने की। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश शासन के नियोजन मंत्री श्री नरेन्द्र नाहटा तथा पार्श्वनाथ विद्यापीठ के निदेशक प्रो० सागरमल जैन विशिष्ट अतिथि के रूप में आमन्त्रित थे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के प्रभावशाली व्यक्ति उपस्थित थे।
सर्वधर्म समभाव और भगवान् बुद्ध
वाराणसी, १६ सितम्बर, १९९५ : श्रमण विद्या संकाय, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा पं० जगन्नाथ उपाध्याय की स्मृति में सर्वधर्म समभाव और भगवान् बुद्ध नामक विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित पार्श्वनाथ विद्यापीठ के निदेशक प्रो० सागरमल जैन ने अत्यन्त सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस संगोष्ठी में बौद्ध धर्म-दर्शन के विशिष्ट विद्वान् प्रो० रामशंकर त्रिपाठी, विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित थे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० वी० वेंकटाचलम् ने इस संगोष्ठी की अध्यक्षता की। इसमें बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के अध्यापक और शोधछात्र उपस्थित थे। सर्वधर्म सम्मेलन सम्पन्न
भोपाल, ४ नवम्बर, १९९५ : परस्पर प्रेम, भाई-चारा, सद्भाव, मनुष्यत्व और समत्व का नाम ही धर्म है। दुर्भाग्य की बात है कि आज हम भारत के मूलतत्त्व को समझने का प्रयास नहीं कर रहे हैं। जिससे समाज में शान्ति, समरसता और बन्धुत्व की भावना का विकास न हो, उसे धर्म नहीं कहा जा सकता, ये विचार 'महात्मा गाँधी - एक सौ पच्चीसवाँ जन्म वर्ष समारोह समिति के तत्त्वावधान में
Jain Education International
For Private & Personal Use Only
www.jainelibrary.org