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________________ ACTAITHILAAMAC HALILAILAENIOR जैनहितैषी। ४८६ जनहितेषी इच्छा ही उनके संचालनमें सब कुछ है। Rose Program Forssss sking यद्यपि उनकी सत्यनिष्ठा और निस्वार्थतामें बाल-विवाह। हमें कुछ भी सन्देह नहीं है, तो भी हम यह आवश्यक समझते हैं कि वे अपने उत्त. [ले०,श्रीयुत ठाकुर शिवनन्दनसिंह बी. ए.।] रदायित्वके महत्त्वको समझें और उसे उदारतापूर्वक अनेक लोगोंमें वाँट दें, अर्थात् दश १ पशु-जगतमें कोई पशु, बिना सर्वांग पुष्ट हुए बच्चा नहीं देता । मनुष्यबीस उत्साहियोंकी एक कमेटी स्थापित करके उसकी सम्मतिसे काम करें । ऐसा करनेसे जगतमें अंगोंकी पुष्टिके लिए २५ वर्षसे संस्थाओं पर लोगोंका विश्वास बढ़ेगा और अधिक समय चाहिए। अतएव इस अव " स्थाके पूर्व ही गर्भाधान करना पशुओंसे भी काम भी सुव्यवस्थित पद्धतिसे चलेगा। हीन कार्य करना है । ऐसा करना न केवल आशा है कि हमारे समाजके संस्था-संचा- निन्दनीय है बल्कि अति हानिकारक भी है। लक सज्जन हमारे इस लेखपर ध्यान देंगे और २ तरुणता ( जवानी ) के प्रथम चिह्नोंसे अपने उत्तरदायित्वको समझकर संस्थाओंकी यह नहीं कहा जा सकता कि अब वे विषय उन्नति करनेमें दत्तचित्त होंगे।९-१०-१६. आदिके योग्य हो गये । बच्चेको दूधका दाँत निकल आने पर यह नहीं समझा जाता दूसरोंको आलोचनाओं, दूसरोंके मतों ओर दूसरोंक कि वह ईख घुस सकता है । विचारोंपर आधार रखनेवाले मनुष्योंको कभी कोई लाभ नहीं होता। एनिंग साहिब एक जगह लिखते हैं-"जो मनुष्य यह सोचकर कि लोग मेरी आलोचना करेंगे- उन अपनी आन्तरिक उच्च भावनाओं को दवा देता है और दूपरे मनुष्यों के साथ हिलमिल कर रहने का योग्यायो : बच्चोंके मुहँ पर उनके विवाहकी बातें करना ग्यके विचार विना प्रयत्न करता है; उसकी बुद्धि भ्रट हो जाती है और चरित्र हल्का-नीच-हो जाता है।" जिससे उनको यह ख्याल पैदा हो जाय कि + + + + वे सयाने हो गये, या ऐसी ही बातोंसे, मैं अमुक पक्षके अन्दर पैदा हुआ हूँ यह सोचकर बच्चोंका विवाह कर देनेसे और उनका अथवा मेरे माता, पिता, भाई, बन्धु अमुक मतके हैं आपसमें मेल जोल होनेसे, या साथके यह सोचकर जो किसी मतविशेषका पक्षपाती बन जाता है, वह कभी न्यायशील नहीं हो सकता। इसीलिए सोनेसे, बच्चे, समयके पहले ही सयाने हो राजकीय और धार्मिक झगड़े होते हैं, इसीलिए मीलोंके जाते हैं और उन्हें शारीरिक हानि मालिक, हुनरों और उद्योगोंके संस्थापक, राजकर्मचारी पहुँचती है। और धार्मिक नेता अपने ही हितके लिए-अपनी ही ___४ अल्पायुका गर्भ माता पिता और स्वयं सत्ता बढ़ानेके लिए-लोगोंके हकोंको-स्वत्वोंको-मिट्टी में मिलानेका प्रयत्न करते हैं। दाइन। उस पेटकी सन्तान तीनोंके लिए अत्यन्त Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.522828
Book TitleJain Hiteshi 1916 Ank 09 10
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNathuram Premi
PublisherJain Granthratna Karyalay
Publication Year1916
Total Pages102
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Jain Hiteshi, & India
File Size13 MB
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