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________________ 56 अपभ्रंश भारती 21 जाता था और विशेष उत्सवों के समय गाया जाता था। फिर भी इसके शास्त्रीय विधान का जितना निर्वाह जैन तथा जैनेतर कवियों ने किया, उतना ये बौद्ध-सिद्ध नहीं कर पाये। इसकी विभुता और विन्यास की दृष्टि से लेखक का 'अपभ्रंश का लाड़ला छन्द दोहा और उसकी काव्य-यात्रा' नामक आलेख पठनीय है।11 'पद्धडिया' या 'पज्झटिका' 16 मात्रावाला मात्रिक छन्द है। 'स्वयंभूछन्दस्' में इसे 4 चौकलोंवाला छन्द कहा है। ‘संदेश-रासक' की भूमिका में प्रो. भायाणी ने इसे अपभ्रंश के प्रबन्ध-काव्यों का प्रमुख छन्द कहा है।12 इसका प्रयोग स्वयंभू, पुष्पदंत, धनपाल, रामसिंह, अब्दुर्रहमान, कनकामर आदि ने बहुलशः किया है। विशेषतः अपभ्रंश के कड़वक-शैली के प्रबन्ध-काव्यों में इसका प्रयोग हुआ है। इसमें कुछेक अर्द्धालियों के बाद दोहा आदि द्विपदी छंदों से घत्ता देने की प्रवृत्ति रही है। इसी रूप में यह हिन्दी के जायसी, तुलसी आदि के मध्ययुगीन प्रबन्धों में दर्शनीय है। यह छन्द पश्चिमी अपभ्रंश में ही अधिक प्रचलित रहा। आचार्य द्विवेदी ने 'चौपाई' के रूप में भी इसके प्रयोग का संकेत किया है।13 चौपाई में भी चार चरण होते हैं और 16 मात्राएँ होती हैं, किन्तु अन्त में गुरु (s) होता है। छन्द-प्रभाकर में 'चौपई' छन्द का भी संकेत किया गया है, जिसमें 15 मात्राएँ और अंत में दो लघु (॥) होते हैं। इसका साम्य बहुत-कुछ अपभ्रंश के 'अडिल्ल' या 'अरिल्ल' छंद से है, जिसमें 16 मात्राएँ तथा अंत में दो लघु (|) होते हैं। 'प्राकृत-पैंगलम्' में भी इसके यही लक्षण दिये गये हैं। इसका प्रयोग रास-काव्यों के साथ-साथ 'संदेश रासक' के 104, 112, 157, 170 तथा 174, 181वें छन्दों में दर्शनीय है। किन्तु रास-काव्यों में ‘अडिल्ल' या ‘अरिल्ल' के साथ 'मडिल्ल' या 'मरिल्ल' छन्द का भी प्रयोग मिलता है। हेमचन्द्राचार्य ने इन्हें एक ही छन्द के दो प्रकार माने हैं। प्रो. भायाणी ने इसी मत का समर्थन किया है। 4 पर, डॉ. वेलणकर के अनुसार जब चारों चरणों में समान लय-ताल का विधान हो, तो वह ‘अडिल्ल' और तीसरे तथा चौथे चरण में प्रथम दो से भिन्न लय-ताल का नियोजन हो, तो वह ‘मडिल्ल' छन्द होता है। यथा -
SR No.521864
Book TitleApbhramsa Bharti 2014 21
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamalchand Sogani
PublisherApbhramsa Sahitya Academy
Publication Year2014
Total Pages126
LanguageSanskrit, Prakrit, Hindi
ClassificationMagazine, India_Apbhramsa Bharti, & India
File Size7 MB
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