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________________ २७ जान्युआरी- २०१९ चडीय संमेतगिरि सुद्ध आतम धरी, करीय संलेहण मासभत्त, छेदीय कम्म अड क्षय करी जिनवरू, आसय सुक्ख सिवपुरीय पत्त; अजर अगोचर अमर अक्षर परं-परमपद निम्मलऽणंतनाणी, सिद्ध अलेख अरूपी निरंजन, निरुपम गुण इकतीस प्राणी! ९ इणि परइ थंभणपुरइ भेट्यउ पास थंभण जिणवरो, घन-नील-रुचि-तनु नाग-लंछन काय नव कर मनहरो; श्रीकनकसोम मुणिंद सहगुरु परम महिमा-सागरो, तसु सीस रंगकुसल सुजंपइ सदा संघ-सुखाकरो. १० ॥ इति श्रीस्तंभनक पार्श्वनाथस्तवनं समाप्तम् ॥ ७. मुनि-गुणसौभाग्य-रचित थम्भण-पार्श्वनाथ-स्तवन वंदीउ वंदीउ रे खंभनयरनो राजिउ, ___ थंभण पासजी रे बहु गुण गेह वीराजीउ; ज्ञान दरिसण रे सूरिजनी परे दीपउ, वर संयम रे करिय कर्म-दल जीपतउ. १ रूअडउ सोहइ रे वामा-कूखिई हंसलउ, जन-मन मोहइ रे सोभागी कुंअर भलउ; परिणावि रे बल करी कूअरिं प्रभावती, ___ परिहरि राजरिद्धि रे लोग त्यजी हूआ आयती. २ जसु सेवइ रे सूरवर नरपती राजीउ, गजपति-गेलि रे चालइ जिन-पति राजीउ; जिनजी राओ रे सूरपति, गुरुहिं वखाणीओ, त्रीभूवन सारे रे थंभण पास सू जाणीओ. ३ धरणिन्द्रराजिई रे पास जिणेसर संथुणो, गणधरदेवि रे सूत्र मझारि वखाणीओ; पालइ जनजी रे आण खरी तुह नीगली, कवीअण भाखइ रे ते भवीअण आस्था फली. ४
SR No.520578
Book TitleAnusandhan 2019 01 SrNo 76
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2019
Total Pages156
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size9 MB
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