SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 58
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ४८ अनुसन्धान-७५(२) ते बिण्हइ भांगा वखाणइ छइ - कम्मिय चुल्लिय भायण डोवठिअं पूड़ कप्पई पुढो । तं, बीअं कम्मिअ वाघार हिंगु लोणाइ जत्थ छुहे२ ॥३४॥ [कम्मि० ॥] आधाकर्मी आहार जीणइ चूल्हइ अथवा भाजिन रांधिउ हुई, अथवा जीणइ डोईइ विहराविउ हुइ, तीणइ चूल्हइ भाजनि अथवा डोईइ जे अनेरु सूधउ आहार घालीइं ते उपकरण आश्री पूतिकर्म कहीइ । पुण ते आहार महात्मा प्रति कल्पतउ हुइ । पुण जउ ते गृहस्थ ते भाजन थिकउं ते वस्तु अलगी करइ, अनेरइ भाजनि आपहणी घालइ तउ सूझतइ । तथा बीजइ भांगइ आधाकर्मी वघार अथवा हींगु अथवा लूण प्रमुख वस्तु जे अनेरा आहारनइं संस्करवानइ काजिइ माहि घालीयइ ते भातपाणी आश्री बीजइ पूतिकर्म कहीइ । ते महात्माहुइं न कल्पइं ॥३४॥ हिव एह जि भातपाणीनउ बीजउ बादरपूतिकर्मनउ भांगउ वली वखाणइ छइ - कम्मिय वेसण धूमिअ-महव कयंकम्मखरडिए भाणे । आहारपूइ तं कम्म-लित्तहत्थाइ छक्कं च ॥३५॥ [कम्मिय० ॥] अथवा आधाकर्मी वेसणइ-तप्तघृतादि प्रमुख वस्तुइ करी जे आहार धूपीइ वा संस्करीइ ते बादर पूतिकर्म कहीइ, ते वर्जिवउ । अथवा आधाकर्मी आहारइ जे भाजन खरडिउं हुइ, तीणइं भाजनि सूधउ आहार घालीइ ते पूतिकर्म कहीइ । अथवा आधाकर्मी आहारइ खरडिउ जे हस्तादिक तीणि हाथिई जे आहार विहरीइ; तेहे बादरपूतिकर्ममाहि आवइ । तेह भणी ते हस्तादिकइ वर्जिवउ ॥३५॥ हिव एह जि दोष आश्री वली विशेष कहइ छइ - पढमदिणंमि कम्मं तिन्निय पूइकम्म पायघरं । पूड़ तिलेवं पिढरं कप्पइ पायं कयतिकप्पं ॥३६॥ पढम० ॥ कृतकर्मपाकं गृहं जीणइ घरि आधाकर्मी आहार पवित्र नीपनु हुइ, ते घरइ पिहलइ दिहाडउं आधाकर्मी कहीइ । तथा त्रिणि दिहाडा ते घर पूतिकर्म कहीइ । एतलइ च्यारि दिहाडा ते घर वर्जिवउं, इस्यिउ भाव । अथवा
SR No.520577
Book TitleAnusandhan 2018 11 SrNo 75 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2018
Total Pages338
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size22 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy