SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 73
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ६६ ए बौद्धिक विनोद पूरो पाडशे. थोडा अपरिचित शब्दोना अर्थ नोंध्या छे. कोई कोई स्थाने शब्दो के पंक्तिओ खूटे छे. गूढाना उकेल ते ते स्थाने लखेला हता, ते नोंध्या छे. अमुक स्थळे अमे शोधीने लख्या छे. ज्यां उकेल नथी मळ्यो त्यां प्रश्नचिह्न मूक्युं छे. ‘सेवक आगळ...' अने 'कह्यो पंडित...' ए बने हरियाली सुप्रसिद्ध छे पण बन्नेनो बो अप्रसिद्ध हशे एम धारीने अहीं मूळ अने बो बन्ने आप्या छे. केटलाक शब्दो सूण खाडेती पाली कबाण पुहर सेणा गूढा बाली कन्या - पोते, जाते आपु पखाणि पत्थरमां बाको छेहउ उपहरी त्रीय चुंबन, बकी नुकसान, दगो, छेडो, अंत ऊंची, ऊंचाईए स्त्री विवसायां वसवायां, कारीगरनी ज्ञाति/ · सजडु जटासहित गंधिया गांधी पंगुरणु पांगरण, ढांकनार — सूथणु, घाघरो हांकनार ? पगपाळी हरियाली छयल पाखइ वगर परणालइ नीकमां मढइ घेटाए **** धनुषी कमान पहोर स्वजन - अनुसन्धान- ७२ छैलछबीलो गूढ पांचे मूठी दशे धरी, हुइ बतीसह नारी, करण हीआली पाठवी, राजा भोज विचारि... १ [ शिला] च्यारि पुरुष नइ सोलह कुलवंती, चिहुं पुरुषनउं एक ज नाम, कहउ नाम कइ छांडउ गाम ... २ [अंगुठउ ] नारी भीतरि नर वसइ, नर भीतरि वसइ नारि, नर गोरो स्त्री सांगली, कहउ अर्थ विचारि... ३ [ आंख ]
SR No.520573
Book TitleAnusandhan 2017 07 SrNo 72
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages142
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size9 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy