SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 66
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ जुलाई-२०१६ शंखेस गुडी थंभणउ, चिंतामणि पास । पाटण श्रीपंचासरु, पूरई मनि आस ॥ तारंगइ वडनगर वीर, नवखंड अझारइ । कुलपाकनइ अंतरीक, आवइ नरनारि ॥ त्रूटक - अवंती पास मगसी कहुं ओ, आरासण अभिराम । राणपूरनइं रामसेण, समरण सीझइ काज ||८|| कुंभलमेर नइ चित्रकोट, पावइ प्रासाद । भरुयच मुनिसुव्रतसामि, गुण गाउं उलास ॥ देवकइ पाटिण चंद्रप्रभ, आठमउ जिणंद । जस गुण गाय सुरनर, मुख पुनमचंद ।। त्रूटक - मालवदेशमांहि सुणउ ओ, वडवाणी भलुं गाम । बावनगज बिंब तिहां नर्मु, नितु उठी लीजइ नाम ॥९।। डुंगरपुरनइं आंतरि, वली ऋषभ ज नाथ । देलवाडई देव वंदतां, हुं हुउ सनाथ ॥ वरकाणउ बंभणवाडि वीर, लोटीण उतारइ । हथिनाउर सूरिपुर नेमजी, दुरगति दुख वारइ ।। त्रूटक - ओ तीरथ जे वंदसइ , भाविस्यु नरनारि । श्रीविमलहर्षसिष्य प्रेम कहिइ, ते पामइ भवपार ॥१०॥ ओ पंचतीरथ आदि देइ मई, कहिया अपार । नाहना मोटा बिंब घणा, न लहुं तस पार ॥ हवइ सास्वता प्रसाद-बिंब, तेहगें कहुं मान । भाव धरि भविजन सुणउ, पवित्र करउ कान ।। छप्पन कोडि आठ लाख वली, सहिस सत्ताणु होइ । चउसइ छयासी उपरि तेहनइ, जग जाणइ सब कोइ ॥११॥
SR No.520571
Book TitleAnusandhan 2016 09 SrNo 70
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2016
Total Pages170
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size11 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy