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________________ ५६ अनुसन्धान-७० चालउ सेनूंज जाइई, हर्षइ करउ जात्र । सूरजकंड करी सनान, निर्मल करउ गात्र ॥ त्रूटक - खीरोदिकनां धोतीयां अ, ओढण जादर चीर । कनक-कलस हाथि धरी, भरियां निर्मल नीर ॥१॥ सुकडि केसर घसीय घj, कचोलइ भरीइ । युगादिदेव पूजा करी, भवसागर तरीइ ।। चंपक-केतक-मालती, माहिं दमणउ सोहइ । कुसुम-माल कंठि ठवउ, जिनना मन मोहिइं ॥ त्रूटक - नादपूजा करउ भावस्युं ओ, नाटिक नविन विज्ञान । सविपद नरनारि वरइ, ते पामइ बहुमान ॥२॥ ऋषभ-भुवन रुलीआमणुं, जाणइ हरिनुं ठाम । मेरतणी परे अचल अह, विमलाचल नाम || हस्तिखंधिइ मरुअदेव, बइठीं दीइ हेल । सुर-नर-नारि सहु मली, पूजइ रंगि रेलइं ।। त्रूटक - सेजेंज-बिंब संख्या सुणउ अ, हुं कहुं मननइ कोडि । पनरसनइं पांसठि वली, नहि को ते सम जोड ॥३॥ सेज-आबु-समेतसिखरि, अष्टापद सोहिइ । रैवति वंदु नेमनाथ, दीठइ मन मोहिइ ॥ पंच तीर्थ ओ पंच मेर, जगमांहि सार । भावइ वंदुं भविय लोय, पामउ भवपार ॥ त्रूटक - ऋषभजिणंद समोसर्या अ, पूर्व नवाणु वार । पुंडरिकस्युं मुनिवरा, बहु पाम्या भवपार ॥४॥ चउइंद्र आदि देइ सूर, सेवा सारइं । तिहुयण तारण वीतराग, भवपार उतारइं ॥ ६. शिवपद ।
SR No.520571
Book TitleAnusandhan 2016 09 SrNo 70
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2016
Total Pages170
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size11 MB
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