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दीवबन्दिरस्थ- श्रीविजयप्रभसूरि प्रति
प्रह्लादनपुरात् पण्डितलालकुशलस्य लेख:- मुनि त्रैलोक्यमण्डनविजय १४९ देवकपत्तनस्थ-श्रीविजयप्रभसूरि प्रति
साहिज्यपुरतः पण्डितहीरविमलस्य लेख:- मुनि त्रैलोक्यमण्डनविजय १५२ पुरबन्दिरस्थ-श्रीविजयप्रभसूरि प्रति रामदुर्गत:
पण्डितकल्याणसागरस्य लेख: - मुनि त्रैलोक्यमण्डनविजय १६३ जीर्णदुर्गस्थ-श्रीविजयप्रभसूरि प्रति मालेपुरात्
पण्डित-आगमसुन्दरस्य लेख: - मुनि त्रैलोक्यमण्डनविजय १७३ शोधलेख: जैनों का प्राकृत साहित्य : एक सर्वेक्षण
- प्रो. सागरमल जैन १८३ ग्रन्थावलोकन : निर्ग्रन्थ परम्परानी अतीतनी शोधयात्रानो परिपाक
- उपाध्याय भुवनचन्द्र म. २०२ कहावली : एक सीमास्तम्भ रूप प्रकाशन – उपाध्याय भुवनचन्द्र म. २०४ विहंगावलोकन
- उपाध्याय भुवनचन्द्र म. २०९ पत्रचर्चा
- उपाध्याय भुवनचन्द्र म. २१२ पत्रनो प्रतिभाव
- मुनि त्रैलोक्यमण्डनविजय २१६ सम्पादकीय नोंध
- विजयशीलचन्द्रसूरि २१९ वर्धमान जिनरत्नकोश अंगे विनन्ति
२२१
पत्र
आर्थिक सहयोगः श्रीभावनगर जैन श्वे. मू. पू. तपा संघना
___ ज्ञानद्रव्यमांथी आ ग्रन्थ-प्रकाशननो लाभ लीधेल छे.
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