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________________ ८६ माला, १९५७ १४. मत्स्यपुराण : डॉ. श्रद्धा शुक्ला, नाग पब्लिशर्स, दिल्ली, २००४ १५. मनुस्मृति : विष्णु वामन बापट, आर. टी. गोडबोले, पुणे, १९१८ १६. महापुराण : पुष्पदन्त, माणिकचन्द्र दिगम्बर जैन ग्रन्थमाला, हीरालाल जैन, पी. एल्. वैद्य, १९३७ १७. मार्कण्डेयपुराण : द्वैपायनव्यासप्रणीत, काशीनाथ वामन लेले, श्रीकृष्ण अनुसन्धान ४५ मुद्रणालय १८. मूलाचार : आ. वट्टेकर, सं. कैलाशचन्द्रशास्त्री, भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन, १९८४ १९. वायुपुराण : १ खण्ड, श्रीराम शर्मा आचार्य, संस्कृति संस्थान, बरेली, १९६७ २०. विधिमार्गप्रपा : जिनप्रभसूरि, सं. जिनविजय मुनि, जव्हेरी मूलचन्द हीराचन्द भगत, मुम्बई, १९४१ २१. व्याख्याप्रज्ञप्ति (विवाहपण्णत्ति) (भगवई) : अंगसुत्ताणि २, जैन विश्वभारती, लाडनूं (राजस्थान), वि.सं. २०३१ २२. सूत्रकृतांग (सूयगड) : अंगसुताणि १, जैन विश्वभारती, लाडनूं (राजस्थान) वि.सं. २०३१ २३. स्मृतिचन्द्रिका : देवणभट्टविरचित, गव्हर्नमेण्ट ओरियण्टल लायब्ररी सिरीज, म्हैसूर, १९१८ २४. स्थानांग (ठाण) : अंगसुत्ताणि १, जैन विश्वभारती, लाडनूं (राजस्थान), वि.सं. २०३१ परिशिष्ट 'पितर' संकल्पना की दृढमूलता तथा व्याप्ति दर्शाने हेतु निम्नलिखित तालिका प्रस्तुत की है । (अ) वेद : १. ऋग्वेद : पितृसम्राट यम, पितरों के गण, पितृपूजा इ. (१०.१४; १०.१५; १०.१६) Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.520545
Book TitleAnusandhan 2008 09 SrNo 45
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year2008
Total Pages114
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size6 MB
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