SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 91
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ (८४) पूर्तिः १. हेमचन्द्राचार्यकृत 'परिशिष्टपर्व'मां 'नखाच्छोटनिका' ए शब्दप्रयोग छे ( मोनिअर विलिअम्झना संस्कृत-अंग्रेजी शब्दकोश अनुसार). (६८)२. स्वयंभूकृत अपभ्रंश महाकाव्य 'पउमचरिय'-भाग-१मां (१९५३)मां में आपेली सार्थ शब्दसूचिमा ए काव्यमांथी 'दुक्क्' अने 'ढोय'ना प्रयोग नोंध्या छे, अने 'उपमितिभवनप्रपञ्चकथा'नो न ददाति .... स्वगृहे ढौकम्' ए प्रयोग पण नोंध्यो छे. 'जहिं सुअ-सारियहुं णाहिं ढोउ' (पउमचरिय, १६, ५, २ ) 'ज्यां शुक -सारिका निकटमां नथी'। रत्ना श्रीयने पुष्पदन्तकृत अपभ्रंश महाकाव्य 'महापुराण'मांथी 'ढुक्क्', 'ढोय' अने 'ढोव'ना प्रयोग नोंध्या छे ( A critical study of Mahapurana of Puspadanta, 1969, पृ. ७०-७१. अर्वाचीन भारतीय-आर्य भाषाओमा आमांथी निष्पन्न शब्दो माटे जुओ ट रनो भारतीय-आर्यनो तुलनात्मक कोश, क्रमांक ५६०९-५६१२ नीचे । संस्कृत प्रयोग पर प्राकृत प्रयोगोनो प्रभाव छे. (४).३,हेमचन्दाचार्यना अपभ्रंश व्याकरणमां बे वार 'सुहच्छी' ('सुहच्छडी') ='सुखासिका' (सुखशाता)नो प्रयोग थयो छे : ४.३७६(२), ४२३(२) (४).४ 'ललति', 'ललते' (= रमे छे, क्रीडामग्न होय छे) 'महाभारत'मां वपरायो छे. (हविटनी Roots, Verb forms and Primary Derivatives of the Sanskrit Language, 1885, पुनर्मुद्रण १९६३, टर्नरनो कोश, क्रमांक १०९६८) ह. भा. पूर्ति : (१) 'मन'ना जूनी गुजरातीना प्रयोगो माटे जुओ जयंत कोठारी, 'मध्यकालीन गुजराती शब्दकोश'. 'मन'मां निषेधवाचक 'म'नी साथे भारवाचक 'न' जोडायो छे. हिन्दीमा 'करो-न' जेवा प्रयोगोमां जे अनुरोध के आग्रहनो वाचक 'न' छे (गुजरातीमा 'ने' छे) ते ज आ होवानुं जणाय छे. (२) 'कत्तावा सुरपुरि गया' एवा हस्तप्रतना पाठने सुधारी, शब्दविभाग जुदी रीते करवाथी 'कित्ता वासर पुरि गया' एम वांचवानुं सूचन योग्य छे, पण पाठ भष्ट होईने 'केता' एवं रूप होवानुं मानवू जोईए. जूनी गुजरातीमा ए ज रूप जाणीतुं छे. ह. भा. Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.520505
Book TitleAnusandhan 1995 00 SrNo 05
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShilchandrasuri
PublisherKalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
Publication Year1995
Total Pages110
LanguageSanskrit, Prakrit
ClassificationMagazine, India_Anusandhan, & India
File Size6 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy