________________ पिया का गांव MARATHI गया—मरना, मृत्यु। तो उठे रोज, खाए-पीए रोज, सोए निर्भर है। एक बात खयाल रखना अत्यंत महत्वपूर्ण—कि रोज-सारी तैयारी की, बस मरने के लिए? अंततः मरे! तो राम बनो तो चेष्टा करनी पड़ेगी, रावण बिना चेष्टा के बन सकते सार क्या है? दो दिन पहले मरे तो हर्ज क्या? दो साल पहले हो। रावण बनने के लिए चेष्टा नहीं करनी पड़ती। रावण बिना मरे तो हर्ज क्या? और पैदा ही न होते तो क्या हर्ज था? या पैदा मेहनत के आदमी बन जाता है। जो कुछ भी न बनेगा वह रावण होते मर गए तो क्या रोना! अगर मौत ही होनी है, कुछ और हो बन जाएगा। रावण के भीतर राम सोया है। राम के भीतर रावण ही नहीं सकता, तो फिर जीवन का कोई अर्थ नहीं है। मोक्ष हो | जाग गया है। बस इतना ही भेद है। सकता है इसीलिए अर्थ है। तुम अगर सोए हो तो मैं कहता हूं, जागना भी हो सकता है। मस्ती में गाते हुए मर्द समय, युग की व्यर्थ बातें मत उठाओ। अपनी भूलें स्वीकार धूप में बैठे बालों में कंघी करती हुई नारियां करो। ऐसे बहाने मत खोजो। यह आत्मवंचना है। ये बड़ी तितलियों के पीछे दौड़ते हुए बच्चे तर्कयुक्त तरकीबें हैं अहंकार को बचा लेने की, सुरक्षा की। फुलवारियों में फूल चुनती हुई सुकुमारियां सीधा-सीधा देखो। जहां गलती मालूम पड़ती हो उसे सुधारो। ये सब के सब ईश्वर हैं जहां नीचे का खिंचाव मालूम पड़ता है उसे तोड़ो। जहां ऊपर क्योंकि जैसे ईसा और राम आए थे, उठने में कठिनाई मालूम पड़ती है उसका अभ्यास करो। ये भी उसी प्रकार आए हैं धीरे-धीरे इंच-इंच चलकर मोक्ष निर्मित होता है। और ईश्वर की कुछ थोड़ी विभूति बूंद-बूंद गिरकर सागर भरता है। अपने साथ लाए हैं तो उपदेशको! आओ हम ईमानदार बनें आज इतना ही। और मानवता को डराएं नहीं, बल्कि यह कहें कि जिस सरोवर का जल पीकर तुम पछताते हो। उस तालाब का पानी हमने भी पीया है और जैसे तुम हंस-हंसकर रोते और रो-रोकर हंसते हो इसी तरह हंसी और रुदन से भरा जीवन हमने भी जीया है गनीमत है कि हर पापी का भविष्य है जैसे हर संत का अतीत होता है आदमी घबड़ाकर व्यर्थ रोता है मैं दानव से छोटा नहीं, न वामन से बड़ा हूं सभी मनुष्य एक ही मनुष्य हैं सबके साथ मैं आलिंगन में खड़ा हूं वह जो हारकर बैठ गया उसके भीतर मेरी ही हार है वह जो जीतकर आ रहा है। उसकी जय में मेरी ही जय-जयकार है महावीर तुम्हारी ही जीत हैं। राम तुम्हारी ही विजय-यात्रा हैं। रावण तुम्हारी ही हार है। जीसस तुम्हारी ही बजती हुई वीणा, जुदास तुम्हारा ही टूटा हुआ तार है। दोनों तुम्हारी संभावना हैं-राम और रावण। और तुम पर 453 ___Jain Education International 2010_03 For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org