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________________ डिसेम्बर २०११ फुल धूपनी भरी तीहा झोली रे : अ : दीप अक्षत लीओ तीहा टोली रे : अ : फल नीवेद लीओ कर जोडी रे : अ : भवपूजा करे दिल खोली रे : अं : रीखः ॥४॥ अंते भवसमुद्रने तरवा रे अ: सीव सुदर वरने वरवा रे अं: गुरु हसतीसरी चीत करवा रे अं: जय जडाबसरी दील धरवा रे : अबोडा : [॥५॥ [नोंध : प्रस्तुत कृतिनी बीजा नकल पण प्राप्त थई छे. अना अक्षरो परथी आ बन्ने नकलो एक ज हाथे थयेली जणाय छे आम छतां अमां थोडाक पाठभेद छे जे नीचे प्रमाणे छे. कडी : ३ पंक्ति २ : कडी : ४ पंक्ति १ : झोहली कडी : ४ पंक्ति ३ : नोवेद] शेठ बलुभाई-रचित (२) श्री मुनिसुव्रतनाथ- स्तवन सि(श्री) सुव्रत नी(जी)न साहबा रे, तुमें सीव वसीआं महाराज जो. तुम्हें माहरा ताहरा सेंना करो रे, मुजमां अंतर राखो जीनराज जो. ॥१॥ माता तुमारी पदमावती रे, वली जनंक सुमितराय जो. तेहनें तमे प्रभु मोकलां रे, माहेन्द्र देवलोक माहराज जो. ॥२॥ सी सुव्रत..... ओक रातमां हे प्रभुजी तंमे रे, आव्या आ(सा)ठ जोजन जीनराज जो, भरु(व)च गांमनी भागोले रे रचु संमोवसरण माहराज जो. ॥३॥ सी सुव्रत..... स्वामी मीत्र जांणी आवा तुंजो रे, अस्व प्रतीबोधणने काज जो, अणसण उचरावु तेहा तमें रे आपु देवलोकनुं तुमें राज जो. ॥४॥ सी सुव्रत.....
SR No.229618
Book TitleKetlik Futkal Krutio
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRasila Kadia
PublisherZZ_Anusandhan
Publication Year
Total Pages7
LanguageHindi
ClassificationArticle & 0_not_categorized
File Size59 KB
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