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________________ व्रत कथा कोष २५७ --- (१) जन्म के दश अतिशयों के दश दशमियों के १० उपवास करे । (२) केवलज्ञान के दश अतिशयों के दश दशमियों के १० उपवास करे । (३) देवनकृत चौदह अतिशयों के चौदह चौदशियों के १४ उपवास करे। (४) चार अनन्तचतुष्टय के चार चौथों के चार उपवास करे । (५) आठ प्रातिहार्यों के १६ अष्टमियों के १६ उपवास करे । (६) पांच ज्ञान के पंचमियों के पांच उपवास करे । (७) छह षष्ठियों के छह उपवास करे। इस प्रकार व्रत पूर्ण कर उद्यापन करे । श्रीं ह्रीं णमो अरिहन्ताणं मन्त्र का जाप्य करे। चन्द्र कल्याणक व्रत चन्द्र कल्याणक दिवस पच्चीस, पांच-पांच दिन ब्योरे दीस । प्रोषध कंजिक एक लठान, रूक्ष जु अनागार पहिचान । चन्द्र कल्याणक व्रत विधि येह, मन वच तन करिये भविलोय । -वर्धमान पु० भावार्थ :-यह व्रत २५ दिन में पूरा होता है । जिसमें प्रथम पांच दिन उपवास, दूसरे पांच दिन कांजिक भोजन, तीसरे पांच दिन एकलठाना, चौथे पांच दिन रूक्ष भोजन, पांचवें पांच दिन मुनिवृति से भोजन करे । व्रत पूर्ण होने पर उद्यापन करे । नमस्कार मन्त्र का त्रिकाल जाप्य करे । चौबीस तीर्थंकर व्रत तीर्थंकर चौबीसी सार, करै वास चौबीस विचार । -वर्धमान पुराण भावार्थ :-यह व्रत २४ दिन में ही समाप्त हो जाता है, २४ तीर्थंकरों के २४ उपवास करे। 'ओं ह्रीं वृषभादिचतुविंशतितीर्थकरेभ्यो नमः' इस मन्त्र का त्रिकाल जाप्य करे।
SR No.090544
Book TitleVrat Katha kosha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages808
LanguageHindi
ClassificationDictionary, Ritual_text, Ritual, & Story
File Size21 MB
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