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________________ वीरजिणिवचरिउ करवक ५ चन्दना द्वारा भगवान्को आहार-दान । ६ भगवान्को केवलज्ञानकी उत्पति । ७ भगवान् के इन्द्रभूति गौतमादि एकादश गणधर । ८ भगवान्का मुनिसंघ सहित विपुलाचल पर्वत पर आगमन । सन्धि -३ वीरजिनेन्द्रको निर्वाण-प्राप्ति [३८-४५] १ भगवान्का विपुलाचल्से विहार करते हुए पावापुर आगमन । २ भगवान्का निर्वाण तथा उनकी शिष्य-परम्परा । ३ प्रस्तुत ग्रन्थ की पूर्व परम्परा । ४ कवि की लोक-कल्याण भावना। ५ कवि-परिचय। सन्धि -४ जम्बूस्वामिकी-प्रव्रज्या [४६-५९] १ राजा श्रेणिक द्वारा अन्तिम केवली विषयक प्रश्न व गौतम गणधर का उत्तर। २ जम्बूस्वामि-विवाह व गृह में चोर प्रवेश । ३ चोरको जम्बूस्वामी को मातासे बातचीत और फिर जम्बूस्वामीसे वार्तालाप | ४ अम्बूस्वामी और विधुच्चर चोरके बीच युक्तियों और दृष्टान्तों द्वारा वाद विवाद । । ५ दृष्टान्तों द्वारा वाद-विवाद चालू । ६ जन्मकूपका दृष्टान्त व जम्बूस्वामी तथा विद्युतपरको प्रवज्या । ७ नम्बूस्त्रामीको केवलज्ञान-प्राप्ति । सन्धि -५ अन्यना-तपग्रहण [६० -७३] १ राजा चेटक, उनके पुत्र-पुत्रियां तथा चित्रपट । २ राजा थेशिकका चित्रपट देखकर चेलना पर मोहित होना और उसका राजकुमार द्वारा अपहरण ।
SR No.090534
Book TitleVeerjinindachariu
Original Sutra AuthorPushpadant
AuthorHiralal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year1974
Total Pages212
LanguageHindi, Apbhramsa
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size3 MB
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