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________________ 1 የ ܕ संधि १० सेणिय सुय-वारिसेण - जोय-साहणं १ सिरिसेवि बेह्मण देविश काले जंतें मल- बिलउ । संजणिय णामैं भणियउ वारिसे सु गुण - निलउ ॥ रायरोहि पक्ष साहिय- रायड़ो । वारिसेणु सुड सेणिय-रायहो ॥ सण-ना-चरित-समिद्धउ | पालिय-वासु पसिद्धउ ॥ एयंत्ररु निसि पडिमा - जोएँ । अच्छ पिउवर्ण पाव- विओएँ । तम्सि चेय नयर म्मि सत्तासउ । अस्थि चोरु विज्जुनचर - नामउ || भण-मोहणाइ बहु-विज्जउ । अंजण सिद्ध कयं व विज ॥ साहस-पउ बहु-वस'मार्फत | गणिया सुंदरि गणिया कंतर ॥ एक्कहिं दियहि जाम तह मंदिरु | जाइ निखहिं सो नवगादिरु || ताम भज पेच्छ विच्छाई । विराय - चंद चंद्रम नं राई ॥ पुच्छिय मन्त्रावि वराणणि । ag समोर काहूँ अकारण || भाइ गणिया सुंदरि दुल्लह न तुज्वरि कोहु हु बल्ल ॥
SR No.090534
Book TitleVeerjinindachariu
Original Sutra AuthorPushpadant
AuthorHiralal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year1974
Total Pages212
LanguageHindi, Apbhramsa
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size3 MB
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