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________________ [१९९ दूसरे दिन सुबह राजा सुमित्र ने बन्दियों को मुक्त कर प्रजाजनों को उपहार देकर आनन्दित करते हुए पुत्र जन्मोत्सव मनाया । जातक जब गर्भ में था तब उसकी मां मुनि-सा व्रत पालन करती थी अतः उसका नाम रखा गया मुनि सुव्रत । यद्यपि वे तीन ज्ञान के धारक थे फिर भी जैसे उन्हें कोई ज्ञान नहीं है इस प्रकार क्रीड़ा करते हुए प्रभु क्रमशः बड़े हुए। जब वे बीस धनुष की लम्बाई प्राप्त कर युवा हुए तब उन्होंने प्रभावती आदि राजकन्याओं से विवाह किया। पूर्व दिशा जिस प्रकार चन्द्र को जन्म देती है उसी प्रकार प्रभावती ने सूवत नामक मुनि सुव्रत प्रभु के पुत्र को जन्म दिया। जब साढ़े सात हजार वर्ष व्यतीत हो गए तब उन्होंने पितृ प्रदत्त राज्य भार ग्रहण किया। भोगावली कर्मों को भोग कर ही क्षय किया जाता है यह जानकर उन्होंने ४५ हजार वर्ष राज्य संचालन में व्यतीत किए। (श्लोक १४०-१४६) ___ लोकान्तिक देवों द्वारा 'तीर्थ स्थापन करिए' यह सुनकर प्रभु ने एक हजार वर्ष तक दान दिया। मुनि सुव्रत प्रभु ने विग्रह नीतिविद और नीति रूपी कमल के लिए भ्रमर स्वरूप स्वपुत्र को सिंहासन पर बैठाया। उनका अभिनिष्क्रमण समारोह राजा सुव्रत और देवों ने मिलकर अनुष्ठित किया। एक हजार आदमी वहन कर सके ऐसी अपराजिता नामक शिविका में बैठकर प्रभु नीलगुहा नामक उद्यान में गए। वह उद्यान आम्रवृक्षों से सुशोभित था। उन वृक्षों की मंजरियाँ दन्तपंक्ति व किसलय जिह्वा-सी लग रही थी। हवा से झर कर इधर-उधर उड़ते सूखे पत्रों का मर्मर वसन्त के आगमन की सूचना दे रहा था। सिन्धुवार पुष्पों के सम्भार से लज्जित हुए युथी पुष्प म्रियमाण हो गए थे। शीतलता व सुगन्ध से सोमराज पुष्प सबके मन को हरण कर रहे थे। (श्लोक १४७-१५३) फाल्गुन मास की शुक्ला द्वादशी को चन्द्र जब श्रवणा नक्षत्र में अवस्थित था प्रभु ने एक हजार राजाओं सहित दो दिनों के उपवास के पश्चात दीक्षाग्रहण कर ली। दूसरे दिन सुबह राजगह के राजा ब्रह्मदत्त के घर खीर ग्रहण कर उन्होंने बेले का पारणा किया। देवों ने रत्नवर्षादि पाँच दिव्य प्रकट किए और राजा ब्रह्मदत्त ने जहाँ प्रभु खड़े थे वहां रत्न वेदी निर्माण करवायी। निरासक्त सर्व कामवजित होकर परिषहों को सहन करते हुए प्रभु ने छद्मस्थ की
SR No.090516
Book TitleTrishashti Shalaka Purush Charitra Part 4
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGanesh Lalwani, Rajkumari Bengani
PublisherPrakrit Bharti Academy
Publication Year1992
Total Pages230
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, History, Story, & Biography
File Size17 MB
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