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________________ विवच मन:पर्ययज्ञानका विषय केवलज्ञान परोक्षप्रमाण स्मृति या स्मरण प्रत्यभिज्ञान सादृष्य-प्रत्यभिज़में उगमानका अन्तर्भाव तर्क अनुमान साधन या हेतु साध्य अनुमानके भेद स्वार्थानुमान के अंग धर्मी : स्वरूप निर्धारण परार्थानुमानके अंग अनुमानके अन्य अवयव हेतुभेद एवं प्रकार हेतुके बाईस भेदोंका सामान्य स्वरूप अर्थापत्तिका अनुमान में अन्तर्भाव अभावका प्रत्यक्षादिमें अन्तर्भाव आगम प्रमाण : विमर्श शब्द और अर्थंका सम्बन्ध प्रमाण - फल प्रमाणाभास हेत्वाभास असिद्ध विरुद्ध अनैकान्तिक अकिंचित्कर दृष्टान्ताभास साधर्म्य दृष्टान्ताभास : भेदनिरूपण वैधदृष्टान्ताभास: भेदनिरूपण **** .... WIE INNY पृष्ठ ४३४ ४३५ ४३५ ४३६ ४३७ ४३९ ४३९ * ४४३ ફ્ ४४२ ४४५ ४४५ ४४५ ४४६ ४४९७ ૪૪૩ ४४९ ४४९ ४५० ४५२ ४५२ ४५३ ૪૧૪ ४९४ ४५४ ४५४ ४५४ ४५५ ४५५ ४५६ विषय-सूची : ३०
SR No.090507
Book TitleTirthankar Mahavira aur Unki Acharya Parampara Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNemichandra Shastri
PublisherShantisagar Chhani Granthamala
Publication Year
Total Pages654
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, History, & Biography
File Size14 MB
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