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________________ ७७ लक्षण विषय गाथा/पृ० सं० । विषय गाथा/पृ० सं० तीसरी पृथिवी में उत्सेध की हानि-वृद्धि का ८. जन्म-मरण के अंतराल का प्रमाण प्रमाण व उत्सेध २४३-२५२ ! २२६-२३२ (गा. २८८) २४४ चौथी पृथिवी में उन्सेध की हानि-वृद्धि का ६. एक समय में जन्म-मरण करने वालों का प्रमाण प्रमाण व उत्सेध २५३-२६० १ २३२-२३४ (गा. २८६) २४५ पांचवीं पृथिवी में उत्सेध की हानि वृद्धि का | १०. नरक से निकले हुए जोवों की उत्पत्ति का प्रमाण व उत्सेघ २६१-२६५। २३४-२३५ कथन (गा. २६०-२६३) २४५-२४६ छठी पृथिवी में उत्सेध की हानि-वृद्धि का ११. नरकायु के बन्धक परिणामों का कथन प्रमाण व उत्सेध २६६-२६६ । २३५-३६ (गा. २६४-३०२) सातवीं पृथिवी में उत्सेघ की हानि-बृद्धि का नरकायु के बन्धक परिणाम २६४ । २४६ प्रमाण व उत्सेध २७० । २३६ अशुभ लेश्याओं का परिणाम २६५ । २४७ श्रेणीबद्ध और प्रकीर्णक बिलों के प्रशुभलेश्यायुक्त जीवों के नारकियों का उत्सेध. २७१ । २३७ २९६-३०२ । २४७-२४८ ५. नारकियों के अधिशान का प्रमारण १२. नारकियों को जन्मभूमियों का वर्णन (गा. २७२) २४० (गा. ३०३-३१३) ६. नारकियों में बीस प्ररूपणानों का निर्देश नरकों में जन्मभूमियों के (गा. २७३-२८४) __ आकारादि ३०३-३०८ । २४८-२४६ नारकी जीवों में गुणस्थान २७४ । २४० नरकों में दुर्गन्ध ३०६ । २५० उपरितन गुणस्थानों का निषेध २७५-७६ । २४१ जन्मभूमियों का विस्तार ३१० १ २५० जीवसमास और पर्याप्तियां २७७ । २४१ जन्मभूमियों की ऊँचाई एवं आकार ३११ । २५० प्रारा और संज्ञाएं २७८ । २४१ जन्मभूमियों के द्वारकोण एवं चौदह मार्गरगाएँ २७६-२८३ । २४१-४२ दरवाजे ३१२-१३ । २५१ उपयोग २८४ १ २४३ १३. नरकों के दुःखों का वर्णन (गा. ३१४.३६१) ७. उत्पद्यमान जीवों को व्यवस्था सातों पृथिवियों के दुःखों का (गा. २८५-२८७) कथन ३१४-३४८ | ३५१-२५८ नरकों में उत्पन्न होने वाले जीवों प्रत्येक पृथिवी के ग्राहार की का निरूपण २८५-२८६ । २४३ गन्धशक्ति का प्रमाण ३४६ । २५६ नरकों में निरन्तर उत्पत्ति का अमुरकुमार देवों में उत्पन्न होने प्रमाण २८७ । २४३ । के कारण ३५० । २५९
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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