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________________ विषय छटी पृथिवी के तीन इंद्रकों का पृथकपृथक विस्तार गाथा / पृ० सं० १५३-१५५ । १६२ सातवीं पृथिवी के अवधिस्थान इंद्रक का विस्तार १५६ | १६३ इंद्र, श्रणीबद्ध और प्रकीर्शक बिलों के बाहल्य का प्रमाण १५७ - १५८ । १६५-६६ रत्नप्रभादि छह पृथिवियों में इंद्रादि बिलों का स्वस्थान अग अंतराल सातवीं पृथिवी में इंद्रक एवं श्रेणीबद्ध बिलों के अधस्तन और उपरिम पृथित्रियों का बाहल्य पहली पृथिवी के अन्तिम और दूसरी पृथिवी के प्रथम इंद्रक का १५६-१६२ । १६७-१६८ १६३ । १६६ परस्थान अन्तराल तीसरी पृथिवी से छठी पृथिवी तक परस्थान अन्तराल छठी एवं सातवीं पृथिवी के इंद्रकों का परस्थान अन्तराल १६४ । १६६ १६५ | २०० ७६ १६६ । २०० पृथिवियों के इंद्रक बिलों का स्वस्थान परस्थान अंतराल १६७-१७६ । २०१-२०५ प्रथमादि नरकों में थे पीबद्धों का स्वस्थान अंतराल १८० १६६ । २०५ २०८ प्रथमादि नरकों में श्रेणीबद्ध बिलों का परस्थान अंतराल १८७-८८ २०८-२०६ प्रकीर्णक बिलों का स्वस्थान- परस्थान १८६-१६५ । २१०-२१३ अंतराल विषय २. नारकियों की संख्या (गा. १६६ - २०२ ) नारकियों की विभिन्न नरकों में संख्या १६६-२०२ । २१४-२१५ ३. नारकियों की प्रायु का प्रमाण (गा. २०३-२१६) पहली पृथिवी में पटल क्रम से नारकियों की आयु का प्रमाण २०३-२०८ १२१६-१७ यायु की हानि वृद्धि का प्रमाण प्राप्त करने का विधान गाथा / पृ० सं० आयु का प्रमाण पांचवीं पृथिवी में नारकियों की दूसरी पृथिवी में पटल क्रम से नारकियों की आयु का प्रमाण तीसरी पृथिवी में पटलक्रम से नारकियों की आयु का प्रमाण चौथी पृथिवी में नारकियों की आयु का प्रमारण छठी पृथिवी में नारकियों की आयु का प्रमाण सातवीं पृथिवी में नारकियों की २०६ । २१७ आयु का प्रमाण श्रेणीबद्ध एवं प्रकीर्णक बिलों में स्थित नारकियों की आयु ४. नारकियों के शरीर का उत्सेध २१० । २१८ २११ । २१८ २१२ । २१६ २१३ ।२१६ २१४ । २१६ २१५ | २२० २१६ । २२० (गा. २१७-२७१) पहली पृथिवी में पटलक्रम से नारकियों के शरीर का उत्सेध २१७-२३१ । २२३-२२६ दूसरी पृथिवी में पटल क्रम से नारकियों के शरीर का उत्सेध २३२-२४२ । २२७-२२६
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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