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________________ ७४ विपय गाथा/पृ० सं० । विषय गाथा/पृ० सं० पृथिवियों के नोचे पवन से रुद्ध क्षेत्रों रत्नप्रभा नाम की सार्थकता २०१ १४४ का घनफल १२७ शेष छह पृथिवियों के नाम एवं आठों पृथिवियों के सम्पूर्ण घनफलों उनकी सार्थकता २१ । १४४ का योग १३१ शर्करा आदि पृथिवियों का बाहल्य २२११४४ पृथिवियों के पृथक्-पृथक् घनफल का प्रकारान्तर से पृथिबियों का बाहल्य २३ । १४५ निर्देश १३३ पृथिवियों से घनोदधि वायु की लोक के शुद्धाकाश का प्रमाण १३७ संलग्नता एवं प्राकार २४-२५ । १४५ अधिकारान्त मंगलाचरण २८६ । १३८ नरक बिलों का प्रमाण प्रथिवीक्रम से बिलों की संख्या २७ ११४६ marimms [गा० १-३७१] बिलों का स्थान २८ । १४७ ३ महाधिकार १ [पृ० १३९-२६४] नरक बिलों में उष्णता का विभाग २६ । १४७ नरक बिलों में शीतता का विभाग ३० । १४७ मङ्गलाचरण पूर्वक नारकलोक कथन उप एवं शीत बिलों की संख्या की प्रतिज्ञा एवं वर्णन ३१-३५। १४८ पन्द्रह अधिकारों का निर्देश २-५ । १३६ बिलों के भेद ३६ । १४६ असनाली का स्वरूप एवं ऊँचाई ६-७ । १४० इन्द्रफ बिलों व श्रेणीबद्ध बिलों की सर्वलोक को वसनालीपने की विवक्षा ८ । १४१ संख्या ३७-३६ । १५१ १. नारकियों के निवास क्षेत्र (गा० ६-१६५) इन्द्रक बिलों के नाम ४०-४५ १५१ रत्नप्रभा पृथिवी के तीन भाग एवं श्रेणीबद्ध बिलों का निरूपण ४६ । १५२ उनका बाहल्य ९।१४१ धर्मादि पृथिवियों के प्रथम श्रेणीबद्ध खर भाग के एवं चित्रापृथिवी के बिलों के नाम ४७-५४ । १५३-५४ १० । १४१ इन्द्रक एवं श्रेणीबद्ध बिलों को चित्रा नाम की सार्थकता ११-१४ । १४२ संख्या चित्रा पृथिवी की मोटाई १५ । १४२ क्रमशःश्रेणीबद्ध बिलों की हानि ५६-५७ । १५५ अन्य पृथिवियों के नाम एवं उनका श्रेणीबद्ध बिलों के प्रमाण निकालने बाहत्य १६-१८ । १४३ की विधि ५८-५९ १५६ पंक भाग एवं अन्बहुल भाग इन्द्रक बिलों के प्रमाण निकालने की का स्वरूप १६ । १४३ विधि ६० । १५७
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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