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________________ विषय प्रत्येक पृथिवी के व्यास का प्रमाण निकालने का विधान अधोलोकगत सात क्षेत्रों का घनफल निकालने हेतु गुणकार एवं आकृति पूर्व-पश्चिम से अधोलोक की ऊँचाई प्राप्त करने का विधान एवं उसकी आकृति त्रिकोण एवं लम्बे बाहुयुक्त क्षेत्र के घनफल निकालने की विधि एवं उसका प्रमारण अभ्यन्तर क्षेत्रों का घनफल सम्पूर्ण अधोलोक का घनफल लघु भुजाओं के विस्तार का प्रमाण निकालने का विधान एवं आकृति १८४ । ५४ अधोलोक का क्रमश: घनफल १८५-१६१ | ५६ ऊर्ध्वलोक के मुख तथा भूमि का विस्तार एवं ऊँचाई गाथा / पृ० सं० लोक में दस स्थानों के व्यासार्थ चय एवं गुणकारों का प्रमाण व्यास का प्रमाण निकालने का विधान लोक के व्यास की वृद्धि हानि १७७ १७८ ७६४६ का प्रमाण ऊर्ध्वलोक के दस क्षेत्रों के अधोभाग का विस्तार एवं उसकी प्राकृति ऊर्ध्वलोक के दसों क्षेत्रों के घनफल का प्रमाण ४५ १५०६ १८१ । ५२ १८२ । ५३ १८३ । ५३ १६२ । ५९ १६३ । ६० १६४ । ६० १६५ । ६१ १६६-१६७ । ६१ १९८-१६९ । ६२ ७२ विषय स्तम्भों की ऊचाई एवं उसकी आकृति स्तम्भ - अंतरित क्षेत्रों का घनफल ऊर्वलोक में आठ क्षुद्र भुजाओं का विस्तार एवं श्राकृति २०३-२०७३ ६६-६७ ऊर्ध्वलोक के ग्यारह त्रिभुज एवं चतुर्भुज क्षेत्रों का घनफल २०८-२१३ । ६८-७० आठ आयताकार क्षेत्रों का और समाली का घनफल सम्पूर्ण ऊर्ध्वलोक का सम्मिलित घनफल सम्पूर्ण लोक के आठ भेद एवं उनके नाम सामान्यलोक का घनफल एवं उसकी आकृति का प्रमाण मेरुस विस्तार गाया / पृ० सं० २०० । ६४ २०१ २०२ । ६.५ लोक के सप्त स्थानों का २१४ । ७१ २१५ । ७१ २२१ । ७६ यत्र का प्रमारण, यवमुरज का धनफल एवं आकृति यव मध्यक्षेत्र का घनफल एवं उसकी आकृति लोक में भन्दर मेरु की ऊँचाई एवं उसकी आकृति अंतरवर्ती चार त्रिकोणों से चूलिका की सिद्धि एवं उसका प्रमाण २२३-२४ १७६ हानि वृद्धि (चय) एवं विस्तार २१६ । ७२ २१७ १७२ २१८-२० । ७४ २२२ । ७८ २२५-२६ । ८० २२७-२९ । ८०
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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