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________________ गाथा २/८२-८३: यहाँ आदि A को निकालने हेतु सूत्र दिया है A= [...] +(D. ७)-[७-१+N]D इसे साधित करने पर पूर्व जैसा सूत्र प्राप्त हो जाता है । यहाँ इष्ट पृथ्वी ७ वीं है, जिसका आदि निकालना इष्ट था । ७ के स्थान पर और कोई भी इच्छा राशि हो सकती है। गाथा २/८४ : चय अर्थात् D को निकालने के लिए ग्रंथकार ने सूत्र दिया हैD=s, + ( [ N-१] ) – (A N ) गाथा २/८५ : ग्रन्थकार ने रत्नप्रभा प्रथम पृथ्वी के संकलित धन (णि बद्ध बिलों की कुल संख्या) को लेकर पद १३ को निकालने हेतु निम्नलिखित सूत्र का उपयोग किया है, जहाँ 1= १३, 5 = ४४२०, d= ८ और 4 = २९२ आदि है ! Vis, d ) - (a-d) (--) इसे भी साधित करने पर पूर्ववत् समीकरण प्राप्त होता है। गाथा २/८६ : उपर्युक्त के लिए दूसरा सूत्र भी निम्नलिखित रूप में दिया गया है =AV (२.J.S.) । (५-६)-(a )}:d इसे साधित करने पर पूर्ववत् ममीकरण प्राप्त होता है । गाथा २/१०५ : यहां प्रचय अथवा d को निकालने का सूत्र दिया है जब अंतिम पद मानलो हो:
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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