SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 312
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ माथा : २६३-२६६ ] विदुओ महाहियारो [ २३५ सत्तासीवी दंडा दो हत्या पंचमीए खोरपीए । पडलम्मि य भम-णामे णारय-जीवाण उच्छेहो ॥२६३॥ दं ८७, ह २ । अर्ग: - पचनी पृवितीवे. ब्रः पटला में को जीवोंके शरीरका उत्सेध सत्तासी धनुष और दो हाथ-प्रमाण है ।।२६३॥ एक्कं कोदंड-सयं झस-णामे णारयाण उच्छेहो। ... ... चावाणि बारसुत्तर-सयमेक्कं अंधम्मि दो हत्था ॥२६४॥ द १००। दं ११२, ह २। अर्थ :-भस नामक पटलमें मात्र सौ धनुष तथा अन्धक पटलमें एकसौ बारह धनुष और दो हाथ प्रमाण नारकियोंके शरीरकी ऊँचाई है ॥२६४।। एक्कं कोदंड-सयं अब्भहियं पंचवीस-हवेहि । धूमप्पहाए' चरिमिदम्मि तिमिसम्मि उच्छेहो ॥२६५।। अर्थ :--धूमप्रभा पृथिवीके तिमिस्र नामक अन्तिम इन्द्र कमें नारकियोंके शरीरका उत्सेध पच्चीस अधिक एकसौ अर्थात् एकसौ पच्चीस धनुष प्रमाण है ।।२६५॥ छठी पृथिवीके उत्सेधकी हानि-वृद्धिका प्रमाण एक्कचाल दंडा हत्थाई वोणि सोलसंगुलया । छठ्ठीए वसुहाए परिमाणं हाणि-वड्ढीए ॥२६६॥ दंड ४१, ह २, अं १६ । अर्थ :---छठी पृथिवीमें हानि-वृद्धिका प्रमाण इकतालीस धनुष, दो हाथ और सोलह अंगुल है ।।२६६।। -.-- ---- - . १. द. क. ठ. धूमप्पहाय ।
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy