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________________ [ २२७ गाथा : २३२-२३५ ] विदुनो महाहियारो दूसरी पृथिवीमें पटल क्रमसे नारकियोंके शरीरका उत्सेध अट्ठ विसिहासणारिंग दो हत्था अंगुलाणि घउवीसं । एक्कारस-भजिदाई उदनो थरणगम्मि बिदिय-यसुहाए॥२३२।। दं ८, ह २, अं । अर्थ : -दूसरी पृथिवी स्तनकन प्रम इन्द्रा में ) नारकियोंके शरीरका उत्सेध पाठ धनुष, दो हाथ और ग्यारहसे भाजित चौबीस अंगुल-प्रमाण है ॥२३२।। णय बंडा बाबीसंगुलाणि एक्करस-भजिद चउ-भागा । बिदिय-पुढवीए तणगिंदयम्हि णारइय उच्छेहो ॥२३३॥ ___९, अं २२ भा । पर्थ :-दूसरी पृथिवीके तनक पटलमें नारकियोंके शरीरकी ऊँचाई नौ धनुष, बाईस अंगुल और ग्यारहसे भाजित चार भाग प्रमाण है ।।२३३।। णय दंडा तिय-हत्थं चउरुत्तर-यो-सयाणि पव्वाणि । एक्कारस-भजिवाणि उदो मण-इंदयम्मि जीवाणं ॥२३४॥ दं ९, ह ३, अं १८ भा । अर्थ :--मन इन्द्रकमें जीवोंके शरीरका उत्सेध नौ धनुष, तीन हाथ और ग्यारहसे भाजित दोसो चार अंगुल प्रमाण है ॥२३४॥ दस वंढा दो हत्था चोट्स पन्याणि प्रट्ट भागा य । एक्कारसेहि भजिदा उवमो 'वर्णागदम्मि बिदियाए ॥२३॥ दं १०, ह २, अं १४ भा १६ । अर्थ :-दूसरी पृथिवीके वनक इन्द्रकमें शरीरका उत्सेध दस-धनुष, दो हाय, चौदह अंगुल और आठ अंगुलोंका ग्यारहवाँ भाग है ॥२३५।। १. द.ब. क. ज. ठ तणगिंदयम्मि ।
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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