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________________ गाथा : ३६-४२ } विदुओ महाहियारो [ १५१ AS CON N Xag ..... ३६.... HEA । ३७........ . HD ... koi .. ...........35 -40 विक्रारी उन्द्रक इन्द्रक C a .. .. . . . .। लाख 40 9. .2 ... .. : सात-पृथिवियोंके इन्द्रक बिलोंकी संख्या एक्कंत-तेरसादी सत्तसु ठाणेसु 'मिलिद-परिसंखा । उणवण्णा पढमादो इंदय-णामा इमा होति ।।३६।। अर्थ :--प्रथम पृथिवीसे सातों पृथिवियोंमें तेरहको प्रादि लेकर एक पर्यन्त कुल मिलाकर उनचास संख्यावाले इन्द्रक नामके बिल होते हैं ।।३।। - पृथिवी क्रमसे इन्द्रक बिलोंके नाम सीमंतगो य पढ़मो णिरयो रोरुग य भंत-उन्भत्ता । संभंत-असंभंता विभंता तत्त तसिदा य ॥४०॥ वक्कंत प्रवक्ता विक्कतो होंति पढम-पुढवोए । थणगो तणगो मणगो वणगो घाडो असंघाडो ।।४।। जिब्भा-जिब्भग-लोला लोलय-"थणलोलुगाभिहाणा य । एवे बिदिय खिबीए एक्कारस इंदया होति ॥४२१॥ १३ । ११ । ५. द. लोलय १. क. मिलदि। २. व. तध। ३. द. धलगो। ४. ब. वाघो । क, दायो। घश । ठ. लोलयचरण ।
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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