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________________ विदुओ महाहियारो मङ्गलाचरण पूर्वक नारक लोक कथनकी प्रतिज्ञा अजिय-जिणं जिय-मयणं दुरित-हरं प्राजवंजवातीदं । पणमिय णिरुवमाणं णारय-लोयं णिहवेमो ॥१॥ पर्ष:-कामदेवको जीतनेवाले, पापको नष्ट करनेवाले, संसारसे अतीत और अनुपम अजितनाथ भगवानको नमस्कार करके नारकलोकका निरूपण करता हूं ॥१॥ __ पन्द्रह अधिकारोंका निर्देश 'रइय-णिवास-खिदी-परिमाणं आज-उदय-पोहोए । गुणठाणावीरगं संखा उप्पज्जमाण जीवाणं ॥२॥ जम्मण-मरणाणंतर-काल-पमाणावि एक्क समयम्मि । उप्पज्जय-मरणाण य परिमाणं तह य प्रागमणं ॥३॥ णिरय-गदि-आउबंधण-परिणामा तह य जम्म-भूमीयो। गाणादुक्ख-सरूवं दंसण-गहणस्स हेदु जोणीग्रो ॥४॥ एवं पण्णरस-विहा अहियारा वण्णिदा समासेण । तित्थयर-वयण-रिणग्गय-णारय-परणत्ति-णामाए ॥५॥ ----- - - - १. द. क. ब. रिणदह । -.- .. .
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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