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________________ गाथा : २२१ ] पढमो महाहिगारो अर्थ :- यवमध्य क्षेत्रमें एक यवका धनफल पैतीसके प्राधे साढ़े-सत्तरहसे भाजित लोकप्रमाण है । इसको पैंतीसके माधे साढ़े साहसे गुणा करनेपन जगले सीके पन-प्रमाण सम्पूर्ण यवमध्य क्षेत्रका घमफल निकलता है ॥२२१।। विशेषार्थ : यवमध्यक्षेत्रको प्राकृति निम्न प्रकार है । इसकी रचना भी लोक अर्थात् ३४३ घनराजूके प्रमाणको दृष्टिमें रखकर की जा रही है । यथा इस प्राकृतिकी ऊँचाई १४ राजू, भूमि ६ राजू और मुख एक राजू है। इसमें एक राजू चौड़े, राजू ऊँचे और ७ राजू मोटाई वाले ३५ अर्धयव बनते हैं, अर्थात् १७ यव पूर्ण और एक यव प्राधा बनता है इसीलिए गाथामें लोक ( ३४३ घनराजू ) को १७६ से भाजितकर एक यवका क्षेत्रफल १६३ घनराजू निकाला गया है और इसे पुन: १७ से गुणित करके सम्पूर्ण लोकका घनफल ३४३ घनराजू निकाला गया है । ___एक अर्धययका धनफल .xxx अर्थात् ६ घनराज है। पूर्ण यवका घनफल x = " अर्थात् १९३ घनराजू है । जब एक अर्धयवका घनफल २ धनराजू है तब ३५ अर्धयवोंका घनफल कितना होगा ? ऐसा पैराशिक करनेपर ४३५३४३ घनराजू होगा।
SR No.090504
Book TitleTiloypannatti Part 1
Original Sutra AuthorVrushabhacharya
AuthorChetanprakash Patni
PublisherBharat Varshiya Digambar Jain Mahasabha
Publication Year
Total Pages434
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & Geography
File Size8 MB
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