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________________ अपभ्रंश कथाका विषयानुक्रम सन्धि -१ चतुर्विशति जिनको नमस्कार, श्रेणिकके प्रश्न के उत्तरमें तीर्थकर-द्वारा सुगन्धदशमी कथाका न्याख्यान । काशी देशका वर्णन । ३ वाराणसी पुरी, राजा पद्मरथ और रानी श्रीमती, वसन्त ऋतुका आगमन । ४ दुर्गन्धके कारण चाण्डाला-द्वारा उसका अटवीमें परित्याग व आठ वर्ष तक 'फलों च पत्तोंसे उसकी जीवनवृत्ति । मुनिसंघका उस ओर विह िव गुरु-द्वारा शिष्यको उसकी दुर्गन्धके कारणका तथा उस पापसे छूटनेका उपाय बतलाना । उत्तम नमावि दश धर्म, पंच उदुम्बर, निशि-भोजन व महापान त्यागका उपदेश । दुर्गन्धा-द्वारा यह सुनना और उसपर श्रद्धान तथा उसके प्रभावसे अगले जन्ममें उज्जयिनीके एक दरिद्र कुटुम्बमें पंदा होना। १० वसन्त का उद्दीपन और दमणियों द्वारा गीत, नृत्य, रास चर्चरी आदि लीलाएँ १५ राजाका रानियों सहित उद्यान-क्रीझके लिए प्रस्थान । मार्गमें सुदर्शन मुनिका दर्शन व रानीको घर लौटकर मुनिको आहार दानका राजाका आदेश । ६: । उसकी दुर्गन्ध कुछ कम हो गयी, जन्म होते ही माताका मरण लकड़ी, घास बेचकर जीवनवृत्ति । नगरमें मुनिआगमन, राजा जयसेनको दर्शन-यात्रा। दुर्गन्धा भी वहाँ पहुँच गयो । ११ रानीका कोप व मुनिराजको कडवी तूम्बोका आहार-दान । मुनिको पीड़ाकी उत्पत्ति । रानीका तुरन्न उयानगमन । देखते ही राजाकी रानीसे विरक्ति। ७ रानीके मुखसे दुर्गन्धकी उत्पत्ति । लौटकर राजा ने मुमिकी मूर्छाका समाचार सुना। राजाका क्रोध व रानीका परित्याग | रानीका आतध्यानसे मरण व ममकी योनिमें दूसरा जन्म, सरोवरकी कीचड़ में फंसकर मरण | तीसरे जन्म में शूकरी, चौथेमें: साँभरी और पाँचबेमें योजन दुर्गन्धा चाण्डालिमीके रूपमें जन्म | मुनिराज के दर्शनसे दुर्गन्धाको मूर्छा, सचेत होने पर राजाके प्रश्न के उत्तर में अपना पूर्व वृत्तान्त-निवेदन | १२ १० राजाके प्रश्न के उत्तरमें मुनि-द्वारा दुर्गन्धा के वृत्तान्त का समर्थन व कर्मों के छेदके लिए सुगन्ध दशमी ऋतका निर्देश । उसी बीच विमान-द्वारा ध्रुवंजय विद्याधरका आगमन । मुनिराज-द्वारा सुगन्धदशमी व्रत पालन व उसके उद्यापनके उपदेशकी प्रतिज्ञा। १३
SR No.090481
Book TitleSugandhdashmi Katha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorHiralal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year1966
Total Pages185
LanguageHindi, Apbhramsa
ClassificationBook_Devnagari, Story, & Biography
File Size5 MB
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