SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 160
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ पिंडवाइया, सुद्धेसणिया अंताहारा पंताहारा अरसाहारा विरसाहारा लूहाहारातुच्छाहारा, अंतजीवी | पंतजीवी, आयंबिलिया पुरमडिया निविगइया, अमजमंसासिणो नो निकाम[नो नियाग]रसभोई ।। ठाणाइया पडिमाठाणाइया उकुडुआसणिया नेसजिया वीरालणिया दंडायतिया लगंडसाइणो[आयावगा] अवाउडा अगत्तया अकंडया आनिहा धुतकेसमंसुरोमनहा, सबगायपडिकम्म| विष्पमुक्का चिट्ठति । [ते णं] एतेणं विहारेणं विहरमाणा बहुई वासाइं सामनपरियागं पाउणति पाउणित्ता आवाहंसि उप्पन्नंसि वा अणुप्पन्नति वा बहूई भत्ताइ[पञ्चक्खंति],पञ्चक्खित्ता बहूई। भत्ताई अणसणाए छेदिति, छेदित्ता जस्सट्टाए कीरइ नग्गभावे मुंडभावे अण्हाण[भावे]गे अदंतवणगे अच्छत्तए अणोबाहणए, भूमिसेजा फलगसेजा कट्टसेजा केसलोए बंभचेरवासे । परघरपवेसे लद्वावलद्धे माणावमाणाओ हीलणाओ निंदणाओ खिसणाओ गरहणाओ तज्जणाओ पामिका शिरश्च वा (?) भूमौ लगति तथा शयनं कुर्वतः । आतापका-आतापनामाहिणः । 'अबाउडा अप्रावृता:-प्रावरणवकाः ।। अगिट्टहा' अनिष्टीवना।" इति हर्षकुलीयदीपिकायाम् ।
SR No.090470
Book TitleAgam 02 Ang 02 Sutrakrutang Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBuddhisagar
PublisherMotichand Maganchand Choksi
Publication Year1962
Total Pages334
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Metaphysics, & agam_sutrakritang
File Size7 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy