SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 423
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ राशि कर 8 बुग्माइति, साहुणो पण्णवेति, पापरेण मुत, पारितो, जाहे ण ठाति ताहे उग्पाडितो, सो हिंडतो रायगिह गतो महातपोतीरमा भावश्यक पासवणे. सत्य मणिनागो नाम नागो, तस्स चेतिते वेणति, सो तत्थ परिसामसे कहेति, जहा-एवं खलु जोवण एगसमएन दो पाकिारयाओ वेदिज्जात, नाह नेज नागेण नीसे चेव परिसाए मझे भणितो-मा एतं पण्णवणं पण्णवेहि, एसा पणवणा दुटु सेहा, उपोषावाद नियुक्ती ६ अहं रचिरं कालं वद्धमाणसामिस्स मूले सुणेमि जथा-एगा किरिया ( एगममएण चेइज्जति ) तुर्म सिलद्रुतराए उ जातो, छडेहि |एत बादं,माते दोसण नासेहामि, एनं तेण सुंदरं, मगवना एत्थ ठितेण समोसरितेण वागरित, एवं सो पण्णवितो अन्मुवगतो उव॥४२॥ का द्वितो मणति-मिच्छामि दुक्कडंति । एस पंचमो निण्ह ओ५॥ । द्वाणि छडओ, पंच सता नोनाला सिद्धिं गतस्स वीरस्स तो तेरासियदिड्डी उप्पण्या । अंतरंजिया नाम नगरी, तत्य भूतगुह नाम चेतिय, तत्थ मिरिगुना नाम आयरिया सिना. तत्थ बलसिरी नाम राया, टेसि पुण सिरिगुत्ताणं थेराणं सडियरो रोहगुत्तो नाम, सो पुण अघणगामे ठितष्ठओ, पच्छा ननो एति, तस्थ य एगो परिवायगो पोट्ट लोहपर्ण घिऊण ज→ साल च गहाय हिंडति, पुच्छितो मणति-नाषण पोई फुङति, तो लोहपण बर्द्ध, जसाला य जहा जंबुदीवे मस्थि मम पडिवादी, ताहे | तेण पडइओ जीणावितो जहा मुण्णा परप्पचाता, तस्स य लोगेण पोट्टसालो नाम कतं, पच्छा तेण रोहगुप्तण धागरित-मा तालेहि ॥२४॥ पडइम, अहं से वादं देमि, एवं सो परिसेहेत्ता गतो आयरियसगास आलोएति-एवं मए पडहगो खोहितो, आयरिया मणंति-18 दुकतं, सो विज्जाचलितो वादे पराजितोऽवि विज्जाहि उपहाति, सो मणति-किं सका एचाहे निलुकित, वाहे तस्स बाय| रिया इमाओ विज्जाओ सिद्धेल्लियाओ देंति तस्स परिवाखा - - ८
SR No.090462
Book TitleAgam 40 Mool 01 Aavashyak Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRushabhdev Keshrimal Jain Shwetambar Sanstha Ratlam
PublisherRushabhdev Kesarimal Jain Shwetambar Sanstha
Publication Year1985
Total Pages617
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Conduct, & agam_aavashyak
File Size18 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy