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________________ JI- +0 . श्री 18 मन्ति, इदाणि वच्चामि, भणति आयरिया-अच्छह ताव महनगं जाव संजता एन्ति, सो भणति-पस्चामि, आयरिया मणति- जापति - " आवश्यकताच दुकहा संजाता, जा घिरा मषंतु जे चला जहा एचाहेवि देविंदा एन्ति, वाहे सो मणति-जदि ते ममं पच्छति तणा घृणा सावधप्पसत्सत्तेण निदाणं वा काहिति, तेण बच्चामि, किंच चिंचं कात्रणं वच्च, ताहे दिवा गंधादी पकिण्णा, परिपतये || उपोद्धार मगजोस कानूण गतो, ताहे आगता संजता, ते पुच्छति-कहि एतस्स दारं, आयरिएहिं वाहिता-इतो एहत्ति, सिप जहा नियुको Mसको वागतो, ते मणति-अहो अम्हेहि न दिहो ?, कीस मुहुर्त न पारिओ, ते चेव साइति जहा अप्पिटिया मण्या मा ॥४१२॥1 |निया काहिति, पारिहेरं कासूण गतीति । एवं ते देविंदर्वदिया मण्णति । | ते अण्णदा विहरता दसपुरं गता, मधुराए य अकिरियवादी उडिओ, जपा-नत्वि माता नात्य पिता एवमादिणाहावदादी, # तत्व संघसमवाजो को, तन्ध पुण बादी पत्थि, साहे इमेसि पयड्डिय इमे य जुगप्पधाणा, ताहे आयता, सि साहति, ते पमहला, तो तेहिं गोडामाहिल्लो पट्टितो, तस्स.य वादलद्धी अस्थि, सो गतो, सेण सो शदे पराजित्रो, सोबि सब तत्व दाह दी। प्रस्तिारते ठिको अच्छनि। इतो य आवरिया समिक्वंति-को गणहरो मवेज्जा, ताहे दुम्बालयपुस्समिलो समिक्खितो, जो पुण तेसिं सपणवग्नी सो| पुलोत)मोहामाहिलो फारक्खिनोपा अणुमतो, गोडामाहिलो आयरियाण मातलो. तत्व पायरिया सन्चे सहविता दिता किरात, बहा तिमि डा-निष्फावकुडे तेल घतकुडो, ते पुण सब्वे देवाहुत्ता कता निष्फाचा सव्वे किंति, वेल्लभारिणीति, तर पुर Pामा हम्मति, वनकुटोहिं पर चेव लमति, एवमेव अहं अन्जो ! दुम्लयपूसमिचं प्रति मुत्तत्वतदुपयेस निष्फोपकासमाणा
SR No.090462
Book TitleAgam 40 Mool 01 Aavashyak Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRushabhdev Keshrimal Jain Shwetambar Sanstha Ratlam
PublisherRushabhdev Kesarimal Jain Shwetambar Sanstha
Publication Year1985
Total Pages617
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Conduct, & agam_aavashyak
File Size18 MB
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