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________________ दाहरणं श्री ५ अम्ह वायणायरिओ भवतु, आयग्यिा भणंति- होहिनि, मा तुम्भे एवं परिभविहिनि नो तुम जाणणाणिमित्तं अहं गतो, पवि अपृथक्त्वा यकीय एस कप्यो, एतेण कण्णाहाडियग, एनम्मचि उम्मारकप्पो कीरति, एवं मो उम्माजिनि, चीयाए मे पोरिसीए अन्थो कहि-18 नुयाग चूर्णी ज्जति, एस तदुमयकप्पजोग्गा, नत्थ जे अन्था आयरियस्म संकिता नेवि तण उग्धाांडेवा, जावतिय दिद्विवाय ने जाणनि नतिओ वनस्वाम्युनियुक्ती दू महिओ, ते विहरता दसपुरं गता, उज्जगीय महयगुना णाम आयरिया थेरकप्पाहता, तेसिं दिहिवाओ अन्थि, संघाडओ मे दिण्णो, ताहे गओ महगुत्ताणं पासे, मडगुत्ता य थेरा सुविणयं पात पामानियताहे पभाते साहणं साहति, जहा मम पडिग्गही खीर॥३९॥ मरितो सो आगंतूण सीहपोतपणं पीना महिना य, तम्स कि फलं होज्जत्ति, ते अण्णमण्णाणि वागरेंति अजाणता, गुरू मांति ण जागड तम्भ, अज्ज मम पाडिच्छओ एहिति, मो सच मुत्तं अत्यं च घेच्छिहिति, भगवपि बाहिरियाए वुत्थो, ताई अतिगतो पगते, दिट्ठो, मुतपुचो एम मो वइंग, तुट्ठी उबवृहि ओ य, ताहे मो सञ्चो पढिओ, ताहे अणुण्णाणिमित्तं जहिं उद्दिको नहिं चेव | वच्चति, दिहिवाओ जेण नेव उदिवा ने चत्र अणुजाणंति, ताहे दसपुर एति, ताहे तेहिं अणुण्णा समारदा, ताव णवरं देवेहि | | अणुण्णा उवद्वविता, दिवाणि पुष्पाणि चण्णा य जस्स अणुपणा० ॥८-४४॥७६। अण्णदा सीहगिरी मतं पच्चक्खाति तस्स गणं दातुं, ताई पंचहि अणगारसएहि संपरिखुडो विहरति, जत्य जत्थ वच्चति तत्थ तत्य ओराला किनिवष्णमदा परिममंति अहो भगवं । किंच ॥३९४॥ जेणुद्धरिया विज्ञा०॥ ८-४६॥ ७६९॥ महापरिणाए विज्जा पम्हट्ठा आसी सा पदाणुसारिणा तेणुद्धरिताभणति य आहिंडेज्जा०॥ ८-४७ ॥ ११ ॥ भणति य धारेतब्बा । ८-४८ ॥ १११ ॥ अहं एवं 12 *EASEAR
SR No.090462
Book TitleAgam 40 Mool 01 Aavashyak Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRushabhdev Keshrimal Jain Shwetambar Sanstha Ratlam
PublisherRushabhdev Kesarimal Jain Shwetambar Sanstha
Publication Year1985
Total Pages617
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Conduct, & agam_aavashyak
File Size18 MB
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