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________________ श्री स्थि, तत्थ मग नम्म आकृतं गाउं पांडरीयं णाम अझयणं पनवेनि, जहा वनस्वाम्यआवश्यक पोक्खलावनीचिजए पोंगगिणी णगरी गलिणिगुम्म उज्जाणं, तत्थ णं महापउमे णाम राया होत्था, पउमावती देवी, 7 धिकारः ताणं दो पुत्ताणं पुंडगए कंडरीण य सुकुमाला जाब पडिस्वा, पुंडरीए जुबराया याचि होत्था। तेणं कालेणं नेणं समनेण थेरा भगवंतो उपोद्घात जाव नलिणिवणे उज्जाणे समोसढा, महापउमे णिग्गते, धम्मै मोच्चा ज णवरं देवाणु पोंडरीयं कुमारं रज्जे ठवेमि, अहामु०, एवं नियुक्ती जाव पोंडरीए राया जाने जाव विहरति । ताणं से कंडरीए कुमारे जुवराया जाते, तएणं से महापउमे राया पुंडरीय राय आपुच्छति, ||३८४॥ एणं से पुंडरीए एवं जहा ओदायगी, णवर चोहम पुवाई अहिज्जति, बहहिं चतुन्थछट्ठ बहुई वासाई साम मासियाए सद्धिं मत्ता जार सिद्धे । अन्नया ते थेग पुवाणुपुच्चि जाब पुंडरिगिणीए समोसदा, परिमा निग्गया, तएणं से पुंडरीए राया कंडरिएणं जुगरन्ना सद्धिं इमीमे कहाए लट्टे ममाणे हंदु जाव गते, धम्मकहा, जाव से पुंडरीए माचगधम्म पडिवण्णे जाव पडिगते, सावए जाते। तए णं से कंडरीए जुवगया थेगणं धम्म सोच्चा हडे जाव जहदं तुम्भे वदह ज णवर देवाणु पुंडरीय राय आपुच्छामि, तएणं जाव पध्वयामि, अहामुह०, नएणं मे कंडरीए जाच धेरै णमंमति णमंसित्ता अंतियाओ पडिनिक्खमति २ तामेव चाउघंटे आसरह है। दुरूहति २ जहा जमाली तहब जाब पन्नोरुहान, जेणेव पुंडरीए राया तणेव उवागच्छति, करतल जाब पुंडरीयं एवं वयासी एवं खलु मए देवाणु० थेराण जाव धम्मे णिसंते, सेवि य मे इच्छित पडिच्छिते अभिरुतिते, तए णं अहं देवाणु संसारमउला बिग्गे मीते जम्मणमरणाणं, इन्छामि गं तुमहिं अभणुष्णात समाणे घेराणं जाव पचतित्तएत्ति, तएणं से पुंडरीए कंडरीय एवं ॥३८॥ वयासी-माणं तुम देवाणु० इयाणि धेगण जाव पव्वयाहि, अहं णं तुम महता महता रायामिसेगेणे अमिसिंचिस्मामि, नएणं से SCESSOCIETERESEASE Lik
SR No.090462
Book TitleAgam 40 Mool 01 Aavashyak Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRushabhdev Keshrimal Jain Shwetambar Sanstha Ratlam
PublisherRushabhdev Kesarimal Jain Shwetambar Sanstha
Publication Year1985
Total Pages617
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Conduct, & agam_aavashyak
File Size18 MB
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