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________________ नारि कन्यविश्यका बावं व कमनीय : यानिट दुर्नी दन बन्दः -य-यर बना द्वाना हना हन् । - न्य स्या यह पूर्व वनमंत्रहाई निमपिनका जन्दहिना भिका क टाव्या कुन: बनान उन मन्नान बन्न यो नियति नत्र मंत्र जन- - - श्री महरः का परम्पर्गविहान मंड-जनम इट बन्द किन यि प्र :- :बम्बमंत्र म्यं चन्द्रसपत्र निकट मानि म अनिदिनकरन नम : दिनः निरनमा ममानः । नेशं चार मां हुई व कृतवान् । घर नि नौमस्यामनार मदनः दिन मिनं बनिन अन । अब बन्नद्रन उन्द्रः गुल्या विना श्याम मुई न्यूज : बनम्मानक: मोजक-र हुन मन्य बुमान निकामिन नगन नदनांकनं । कारबया विविनानि निष्पाद नपा करहल ना.. जिना छन भूमिग । ननहान्याः क्यान्मनेन मात्रा मोनावाहनः । कोपि तवापन्य कापि भोजनसामजीमदृष्ट्वा विस्मयं
SR No.090433
Book TitleDanadikulaksangrah
Original Sutra AuthorDevendrasuri
AuthorJinendrasuri
PublisherHarshpushpamrut Jain Granthmala
Publication Year
Total Pages292
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Religion
File Size7 MB
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