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________________ १३ अर्थ- सप्तांग राज्य, नवनिधि कोष छह प्रकार की सेना, चौदह रत्न, छियानवे हजार स्त्रियाँ और वैभव - यह सब सुपात्रदान का फल जानो । देश. विशेष – सप्ताङ्गराज्य- १. राजा, २ मन्त्री, ३. मित्र. ४ कोष, ६. किल्ला, और ७. सेनः । ५. नवनिधि पद्मः कालो महाकाल: सर्वरत्नश्च पांडुक: । नैसर्पो माणवः शंख: पिंगला निधयो नव ॥ १० ॥ सम. अ. १. पद्म, २. काल, ३. महाकाल ४. सर्वरत्न, ५. पांडुक्र, ६. सर्प, माण्णव, ८. शंख, ९. पिंगल ये नव निधियाँ हैं । ७. चौदह रत्न रयणसार सेनापति स्थपति-हम्यंपत्ति-द्विपाश्च स्त्री- चक्र - चर्म-मणि - काकिणका - पुरोधाः । छत्रासि दंडपतयः प्रणमन्ति यस्य, तस्मै नमस्त्रिभुवन प्रभवे जिनाय ॥ ९ ॥ सम. अ. चाम अपि मणि और णी- ये सात अजीव रत्न हैं तथा सेनापति, गृहपति हाथी घोड़ा स्त्री शिलावट और पुरोहित ये सात सजीव रत्न हैं । 1 षडंगबल - हाथी, घोड़ा, रथ, पदाति, गजसवार, अश्वसवार । सकल सुखों की प्राप्ति सुपात्र - दान का फल सुकुल- सुरूव- सुलक्खण- सुमइ सुसिक्खा सुसील सुगुण- सुचरितं । सयलं सुहाणु- भवणं विहवं जाणह सुपत्त - दाणफलं ।। २१ ।। 1 अन्वयार्थ - - ( सुकुल) उत्तम कुल ( सुरूव ) उत्तम रूप ( सुसिक्खा ) उत्तम शिक्षा ( सुसील ) उत्तम स्वभाव ( सुगुण ) उत्तम गुण ( सुचरितं ) उत्तम चारित्र ( सयलं ) सम्पूर्ण / सकल ( सुहाणुभवणं ) सुखों का अनुभव और ( विहवं ) वैभव - यह सब ( सुपत्तदाण-फलं ) सुपात्रदान का फल ( जाणह ) जानो । 4 अर्थ - उत्तम कुल उत्तम रूप, उत्तम लक्षण, उत्तम बुद्धि, उत्तम शिक्षा, .
SR No.090400
Book TitleRayansar
Original Sutra AuthorKundkundacharya
AuthorSyadvatvati Mata
PublisherBharat Varshiya Anekant Vidwat Parishad
Publication Year
Total Pages142
LanguageHindi, Prakrit
ClassificationBook_Devnagari, Sermon, Ethics, & Religion
File Size3 MB
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