SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 76
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ परमटि इशुव - हमहणाकार • भीसावणं । भेड़-दुग्धोध - संघE • लोहावा ॥२॥ खग्ग - खणखलाकार - गम्भीरयं । जाय-किलिविवि-गप्पन्त-घर-चारवं भिवधि-भूभाराकार • रसस्वयं । पहर-पदभार-वावार - हुप्पेयं ॥३॥ हर - मुकेश - दुधार लयं । दन्सि - दन्सग-लगाम्त-पाइयं ५५|| मिण-वत्यालुईस - विहलबलं । णीसरसम्त-मालावली - शुम्भलं ॥३॥ तेत्यु पट्टम्सए दारुणे भरणे । इणुव-माहिन्द अस्मिह समसा ॥७॥ वे वि सुण्डीर-सहाय-सकारणा । वि मायड्ग - कुम्भस्थालुहारणा || वे निणह-गामिणो वे वि विधाहरा । वे वि जस-कहिणो वे वि फुरियाहरा ।। घत्ता पवण-महिन्दनहुँ णिय-णिय वाहणे हि णिविद्वहुँ । गुज्झु समरिमजिउ णावह हयगीव-सिविदाहुँ॥१०॥ [५] तहि महिन्वणन्वर्णण विरुदं परम-अभिडे । ___ यरहरम्ति सर-धोरणि लाइब हाव-श्यबजे ॥ ३१॥ पाहणा वि विउ - वाण-जालयं । णिसि-खएँ व रविणा तमालयं ॥२॥ बहुमतुल - माया - दवग्गिणा । मोह-जालमित्र परम-जोग्गिणा ॥३॥ उलइ मह-यलं अलण-दीवियं । पर-वलं असेसं पलीवियं ॥४॥ कहाँ वि बकासु वि धयग्गयं । कहाँ वि पजलिय उत्तमङ्गत्यं ॥५॥
SR No.090355
Book TitlePaumchariu Part 3
Original Sutra AuthorSwayambhudev
AuthorH C Bhayani
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year
Total Pages261
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Story
File Size4 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy